पटना | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News
बिहार में दूध उत्पादन के मामले में समस्तीपुर ने राज्य के सभी जिलों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। जिले में प्रतिदिन करीब 15.64 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वहीं, 15.33 लाख लीटर प्रतिदिन उत्पादन के साथ सारण दूसरे स्थान पर है। वैशाली तीसरे और बेगूसराय चौथे स्थान पर हैं।
दूसरी ओर, किशनगंज, पश्चिम चंपारण, सहरसा, मधुबनी और कटिहार जैसे जिलों में दूध उत्पादन अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया है। राज्यभर में फिलहाल रोजाना औसतन 24 लाख लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है।
समस्तीपुर बना दूध उत्पादन में नंबर-1
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, समस्तीपुर में प्रतिदिन 15,64,573.6 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इस आंकड़े के साथ जिला बिहार में पहले स्थान पर है। सारण में रोजाना करीब 15.33 लाख लीटर दूध का उत्पादन दर्ज किया गया है।
दूध उत्पादन की जिलावार सूची में वैशाली और बेगूसराय भी आगे हैं। वहीं, सीमांचल और उत्तर बिहार के कुछ जिलों में उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
चारा और बाजार की उपलब्धता से समस्तीपुर को फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्तीपुर में धान, गेहूं और सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इससे पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। बेहतर कृषि व्यवस्था का लाभ स्थानीय पशुपालकों को भी मिलता है।
वैशाली में दियारा क्षेत्र के कारण पानी और हरे चारे की उपलब्धता को पशुपालन के लिए अनुकूल माना जाता है। इसके अलावा पटना के नजदीक होने से दुग्ध उत्पादकों को बड़ा बाजार भी मिल जाता है।
इसके विपरीत उत्तर बिहार और सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई बार चारे की उपलब्धता प्रभावित होती है। इससे पशुपालन और दूध उत्पादन पर असर पड़ता है।
सीमांचल और उत्तर बिहार के इन जिलों में उत्पादन कम
रिपोर्ट के मुताबिक, किशनगंज, पश्चिम चंपारण, सहरसा, मधुबनी और कटिहार में दूध उत्पादन राज्य के अग्रणी जिलों की तुलना में कम है। इन क्षेत्रों में पशुपालकों को चारे की उपलब्धता, प्राकृतिक आपदाओं और अन्य स्थानीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
विभाग की योजना है कि कम उत्पादन वाले जिलों में पशुपालकों को प्रशिक्षण और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम किया जाए।
दूध की गुणवत्ता और संग्रहण पर होगी ऑनलाइन निगरानी
डेयरी, मत्स्य एवं पशुपालन विभाग राज्य में दूध संग्रहण और गुणवत्ता की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर शुरू करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल इसका ट्रायल चल रहा है।
इस व्यवस्था के जरिए जिलों में रोजाना होने वाले दूध संग्रहण की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। साथ ही दूध में फैट और पोषक तत्वों की स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी। इससे उत्पादन और गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों की नियमित मॉनीटरिंग में मदद मिलने की उम्मीद है।
बिहार में रोजाना एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य
विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक के मुताबिक, बिहार में प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए कम उत्पादन वाले जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ऐसे क्षेत्रों में पशुपालकों को विशेष प्रशिक्षण देने के साथ चारे की व्यवस्था उपलब्ध कराने की योजना है। विभाग का उद्देश्य पशुपालन को बढ़ावा देना और राज्य में दूध उत्पादन की क्षमता में वृद्धि करना है।
डेयरी क्षेत्र में बढ़ेगी जिलावार निगरानी की भूमिका
बिहार में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को प्रशिक्षण, पर्याप्त चारा और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही प्रस्तावित कमांड सेंटर के माध्यम से दूध संग्रहण और गुणवत्ता की ऑनलाइन निगरानी से विभाग को जिलावार स्थिति समझने में मदद मिल सकती है।
अब देखना होगा कि इन योजनाओं के जरिए कम उत्पादन वाले जिलों में कितनी प्रगति होती है और राज्य एक करोड़ लीटर प्रतिदिन उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
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