Tuesday, October 20, 2026

बिहार के 6 जिलों में नए बालू घाटों से खनन की तैयारी, 452 घाटों की होगी नीलामी.

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Bihar Sand Mining: बिहार में निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। राज्य के छह जिलों में नए बालू घाटों की पहचान कर वहां खनन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके साथ ही पहले से चिह्नित लेकिन अब तक नीलाम नहीं हुए बालू घाटों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने की योजना है।

बालू की आपूर्ति बढ़ाने पर विभाग का जोर

बिहार में सरकारी और निजी निर्माण परियोजनाओं के लिए बालू की मांग बनी रहती है। ऐसे में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग के लिए अहम है। बालू की कमी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए नए घाटों को खनन के दायरे में लाने और लंबित नीलामी प्रक्रिया पूरी करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

विभाग की योजना के मुताबिक, नए घाटों से खनन शुरू होने और पुराने घाटों की बंदोबस्ती पूरी होने से बाजार में बालू की आपूर्ति बढ़ सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति खनन शुरू होने और आपूर्ति व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

बिहार के इन 6 जिलों में नए बालू घाटों की तलाश

खान एवं भूतत्व विभाग की जानकारी के अनुसार, नए बालू घाटों से खनन की संभावनाएं जिन छह जिलों में तलाशी जा रही हैं, वे हैं:

  • गया
  • अरवल
  • जमुई
  • पटना
  • भोजपुर
  • औरंगाबाद

इन जिलों में नए घाटों की पहचान कर वहां से बालू निकालने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा, पहले से चिह्नित उन घाटों की बंदोबस्ती कराने की भी तैयारी है, जिनकी अब तक नीलामी नहीं हो सकी है।

452 बालू घाटों की नीलामी बाकी

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, बिहार में सफेद यानी उजले बालू के 541 घाट और पीले बालू के 466 घाट चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 452 घाटों की नीलामी की प्रक्रिया अभी बाकी है।

इन घाटों की बंदोबस्ती में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारियों को प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। विभाग का उद्देश्य लंबित नीलामी पूरी कर अधिक से अधिक घाटों को खनन व्यवस्था से जोड़ना है।

बालू की उपलब्धता बढ़ने से निर्माण कार्यों को मिल सकती है राहत

यदि नए घाटों से खनन शुरू होता है और लंबित घाटों की नीलामी समय पर पूरी हो जाती है, तो बिहार में बालू की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है। इससे घरों, इमारतों, सड़कों और अन्य निर्माण परियोजनाओं को राहत मिल सकती है।

हालांकि, बालू की किल्लत पूरी तरह खत्म होगी या नहीं, यह खनन की शुरुआत, उत्पादन, परिवहन और बाजार में आपूर्ति पर निर्भर करेगा। फिलहाल विभाग की ओर से नए घाटों की पहचान और लंबित बंदोबस्ती की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है।

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