Tuesday, October 27, 2026

बिहार के जेल वार्डरों को हर साल मिलेगा एक माह का अतिरिक्त वेतन, पटना हाईकोर्ट का आदेश.

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26 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

पटना: बिहार के जेल वार्डरों के वेतन और मानदेय से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने बिहार जेल मेन्स एसोसिएशन की याचिका स्वीकार करते हुए जेल वार्डरों को 27 अगस्त 2015 से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक माह के वेतन के बराबर अतिरिक्त मानदेय देने का आदेश दिया है।

जस्टिस डॉ. अंशुमान की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि यह लाभ केवल 28 जनवरी 2019 या 3 अक्टूबर 2024 से नहीं, बल्कि 27 अगस्त 2015 से देय होगा। इस फैसले से बिहार के जेल वार्डरों को संबंधित अवधि के बकाया भुगतान का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। भुगतान की वास्तविक प्रक्रिया और गणना संबंधित सरकारी आदेशों के अनुसार होगी।

क्या है पूरा मामला?

राज्य सरकार ने 27 अगस्त 2015 को एक संकल्प जारी किया था। इसके तहत बिहार पुलिस, फायर सर्विस, जीआरपी, बीएमपी और जिला पुलिस के अराजपत्रित कर्मियों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक माह के वेतन के बराबर अतिरिक्त मानदेय देने का निर्णय लिया गया था।

हालांकि, इस व्यवस्था में जेल विभाग के वार्डरों को शामिल नहीं किया गया था। इसी आधार पर जेल वार्डरों के अतिरिक्त मानदेय की पात्रता और भुगतान की शुरुआत को लेकर विवाद सामने आया।

2019 और 2024 के आदेश को एसोसिएशन ने दी चुनौती

खबर के अनुसार, कारा निरीक्षणालय ने पत्र संख्या 712 के माध्यम से 28 जनवरी 2019 को जेल कर्मियों के लिए संशोधित भत्तों से संबंधित आदेश जारी किया था। इसके बाद गृह विभाग (कारा) ने 3 अक्टूबर 2024 को पत्र संख्या 7876 के जरिए वार्डरों को एक माह के मानदेय का लाभ देने का निर्णय लिया।

बिहार जेल मेन्स एसोसिएशन ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया। एसोसिएशन की मांग थी कि जब अतिरिक्त मानदेय देने की मूल नीति 2015 में लागू हुई थी, तो जेल वार्डरों को भी उसी तारीख से इसका लाभ मिलना चाहिए।

कोर्ट ने समानता के सिद्धांत का किया उल्लेख

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस सवाल पर विचार किया कि मूल सरकारी नीति लागू होने के समय जेल वार्डरों को लाभ से बाहर क्यों रखा गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने समान काम के लिए समान वेतन और संविधान के अनुच्छेद 14 तथा 16 में निहित समानता के सिद्धांत का उल्लेख किया। अदालत का कहना था कि किसी तकनीकी चूक के कारण कर्मचारियों के किसी वर्ग को लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

अदालत ने पूर्व में निगरानी विभाग के कर्मियों से जुड़े एक मामले में 2015 से लाभ दिए जाने के फैसले का भी संदर्भ दिया। रिपोर्ट के अनुसार, उस मामले में एकलपीठ के फैसले को खंडपीठ ने भी सही ठहराया था।

जेल वार्डरों को क्या मिलेगा लाभ?

पटना हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, पात्र जेल वार्डरों को 27 अगस्त 2015 से प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एक माह के वेतन के बराबर अतिरिक्त मानदेय दिए जाने का लाभ मिलेगा।

इसका अर्थ है कि भुगतान की गणना में केवल 2019 या 2024 से शुरू होने वाली अवधि ही नहीं, बल्कि अदालत द्वारा निर्धारित 2015 की तारीख को भी ध्यान में रखना होगा। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राशि उसकी पात्रता, सेवा अवधि और लागू नियमों के आधार पर निर्धारित की जाएगी।

सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?

यह फैसला सरकारी कर्मचारियों को दिए जाने वाले लाभों में समानता और प्रशासनिक नीतियों के समान अनुपालन से जुड़े सवालों को सामने लाता है। अदालत के आदेश में जेल वार्डरों को अतिरिक्त मानदेय देने की शुरुआत की तारीख को स्पष्ट किया गया है।

अब आदेश के अनुपालन और पात्र कर्मचारियों के भुगतान की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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