पटना: बिहार सरकार ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल शिक्षा की सुविधा बढ़ाने की दिशा में ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप शुरू किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 अगस्त को पटना में इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य छात्रों को स्कूल की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन संसाधन उपलब्ध कराना है।
किन छात्रों को मिलेगा फायदा?
शुरुआती चरण में यह सुविधा बिहार के करीब 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई है। योजना का आगे अन्य सरकारी स्कूलों तक विस्तार करने की बात कही गई है।
सरकार के अनुसार, राज्य के सभी 38 जिलों में करीब 3 लाख विद्यार्थियों को इस पहल से लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है।
9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए सुविधा
ऐप पर कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों की पढ़ाई के लिए डिजिटल सामग्री और शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा। वहीं 11वीं और 12वीं के विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए लाइव ट्यूटर सपोर्ट की व्यवस्था की गई है।
विद्यार्थी अपनी जरूरत के अनुसार शिक्षकों से सवाल पूछ सकेंगे और ऑनलाइन माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगे।
JEE और NEET की तैयारी भी होगी
‘बिहार विद्या साथी’ को केवल स्कूल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है। प्लेटफॉर्म पर JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी अध्ययन सामग्री और प्रैक्टिस सेट उपलब्ध कराने की योजना है।
इससे उन छात्रों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता मिलने की उम्मीद है, जिन्हें महंगी कोचिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती।
विद्यार्थियों के लिए नहीं होगा कोई शुल्क
सरकार की इस पहल के तहत छात्रों को ऐप की शैक्षणिक सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। प्लेटफॉर्म पर डिजिटल स्टडी मटेरियल के साथ तकनीक आधारित लर्निंग टूल्स भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
75 हजार शिक्षक ऑनलाइन सहायता देंगे
ऐप की एक प्रमुख विशेषता ऑनलाइन डाउट-सॉल्विंग सुविधा है। सरकार के अनुसार, करीब 75,000 शिक्षक विद्यार्थियों के सवालों का समाधान करने के लिए ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे।
इस व्यवस्था के जरिए छात्रों को पढ़ाई से जुड़े सवालों पर समय पर सहायता देने की कोशिश की गई है।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
राज्य सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विद्यार्थियों को स्कूल की नियमित पढ़ाई के अलावा अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकेगा। खासतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को इससे फायदा पहुंचाने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पहल का उद्देश्य यह है कि आर्थिक या संसाधनों की कमी के कारण किसी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो और उसे घर से ही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक मार्गदर्शन मिल सके।
