Tuesday, September 29, 2026

बड़बिल-बोलानीखदान रेलखंड का होगा दोहरीकरण, 122 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी माल ढुलाई क्षमता.

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जमशेदपुर: दक्षिण-पूर्व रेलवे के बड़बिल-बोलानीखदान रेलखंड को लेकर रेलवे ने अहम निर्णय लिया है। करीब 6 किलोमीटर लंबे इस सिंगल रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है। परियोजना पर लगभग 122 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेल लाइन के दोहरीकरण से लौह अयस्क समेत अन्य खनिजों की ढुलाई करने वाली मालगाड़ियों के संचालन में तेजी आने की उम्मीद है।

हर साल 8.9 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता

रेलवे के मुताबिक, दोहरीकरण पूरा होने के बाद बड़बिल-बोलानीखदान मार्ग से हर साल करीब 8.9 मिलियन टन अतिरिक्त माल का परिवहन किया जा सकेगा। अभी सिंगल लाइन होने के कारण मालगाड़ियों को कई बार दूसरी ट्रेनों के गुजरने या क्रॉसिंग के लिए इंतजार करना पड़ता है।

दोहरी लाइन उपलब्ध होने के बाद ट्रेनों के परिचालन में अधिक लचीलापन आएगा। इससे मालगाड़ियों के संचालन चक्र में लगने वाला समय घट सकता है और खनिज ढुलाई की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी।

रोज करीब छह लोडेड रेक से होती है लौह अयस्क की ढुलाई

बड़बिल-बोलानीखदान रेलखंड खनिज परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। वर्तमान में इस रूट से प्रतिदिन लगभग छह लोडेड रेक के जरिए लौह अयस्क की ढुलाई होती है। सालाना करीब 9 मिलियन टन लौह अयस्क इस रेलमार्ग के माध्यम से भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

इस मार्ग से सेल की बोलानी खदानों के साथ रुंगटा और खटाऊ नरभेराम की निजी साइडिंग्स से लौह अयस्क और पेलेट्स की ढुलाई की जाती है। इन खनिजों को देश के विभिन्न इस्पात संयंत्रों और बंदरगाहों तक पहुंचाया जाता है।

खनिज कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती

रेलखंड के दोहरीकरण को क्षेत्र में खनिज परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सेल की खदानों में प्रस्तावित विस्तार, इस्पात संयंत्रों की बढ़ती उत्पादन क्षमता और बंदरगाहों पर बढ़ती मांग के बीच इस रेलमार्ग की क्षमता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

परियोजना पूरी होने के बाद मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा। इससे खनिजों की आवाजाही को सुचारू बनाने और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

मालगाड़ियों की रफ्तार और परिचालन दक्षता पर असर

सिंगल लाइन की तुलना में डबल लाइन होने से ट्रेनों के ठहराव और क्रॉसिंग से जुड़ी बाधाएं कम हो सकती हैं। इसका सीधा लाभ खनिज ढुलाई करने वाली मालगाड़ियों के परिचालन को मिलने की उम्मीद है।

रेलवे की इस परियोजना से बड़बिल-बोलानीखदान क्षेत्र में खनिज आधारित परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलने के साथ भविष्य की बढ़ती माल ढुलाई जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।

BharatSuperFastNews | जमशेदपुर डेस्क

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