रांची: झारखंड में सहायक अध्यापकों (पारा शिक्षकों) के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की वैधता से जुड़े विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने का निर्णय लिया है। इसके लिए लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की खंडपीठ में होगी।
पूर्वी सिंहभूम के शिक्षकों से जुड़ा है मामला
यह विवाद पूर्वी सिंहभूम जिले के उन सहायक अध्यापकों से संबंधित है, जिनके प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान उनकी मान्यता को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधीक्षक स्तर से कुछ शिक्षकों की सेवा समाप्त करने और मानदेय रोकने की कार्रवाई की गई थी।
प्रभावित शिक्षकों ने विभागीय कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पिछले सप्ताह एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सेवा समाप्ति और मानदेय रोकने की कार्रवाई को रद्द कर दिया था।
अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय देने का निर्देश
एकल पीठ ने संबंधित शिक्षकों को राहत देते हुए अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का निर्देश भी दिया था। इस आदेश के बाद शिक्षा परियोजना ने अब इसे खंडपीठ में चुनौती देने का फैसला किया है।
LPA दाखिल होने के बाद मामले में एकल पीठ के आदेश की दोबारा न्यायिक समीक्षा होगी। प्रमाण पत्रों की मान्यता और विभाग की ओर से की गई कार्रवाई इस सुनवाई के प्रमुख बिंदु रहेंगे।
सत्यापन के बाद सामने आया था विवाद
सहायक अध्यापक सेवा शर्त नियमावली 2022 लागू होने के बाद पारा शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद शिक्षकों के शैक्षणिक और अन्य प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया।
इस प्रक्रिया के दौरान कुछ शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की मान्यता को लेकर सवाल उठे। विभागीय स्तर पर प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग जिलों में कार्रवाई की गई। कुछ मामलों में सेवा समाप्त की गई, जबकि कुछ शिक्षकों का मानदेय रोक दिया गया।
1500 से ज्यादा शिक्षक हुए प्रभावित
प्रमाण पत्रों से जुड़े इस विवाद की कार्रवाई का असर राज्य के 1500 से अधिक सहायक अध्यापकों पर पड़ा था। इनमें प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक शामिल हैं।
प्रभावित शिक्षकों ने प्रमाण पत्रों की वैधता के साथ-साथ वर्षों से की जा रही सेवा और उसके बाद हुई विभागीय कार्रवाई को भी अदालत में चुनौती दी है।
कुछ संस्थानों के प्रमाण पत्रों पर उठी आपत्ति
सत्यापन के दौरान इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद और हिंदी महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद समेत कुछ संस्थानों से जारी मैट्रिक और इंटरमीडिएट प्रमाण पत्रों को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठाए गए थे।
इन प्रमाण पत्रों से जुड़े शिक्षकों में कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 तक के विद्यालयों में कार्यरत सहायक अध्यापक शामिल बताए गए हैं। प्रमाण पत्रों की जांच से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर संबंधित जिलों में कार्रवाई की गई थी।
अब खंडपीठ के फैसले पर टिकी नजर
एकल पीठ के आदेश के बाद प्रभावित शिक्षकों को राहत मिली थी, लेकिन JEPC के LPA दाखिल करने के फैसले से मामला फिर न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचने जा रहा है। अब खंडपीठ में प्रमाण पत्रों की मान्यता, सेवा समाप्ति, मानदेय रोकने और बकाया भुगतान से जुड़े पहलुओं पर आगे सुनवाई होगी।
इस मामले में आने वाला फैसला प्रमाण पत्र सत्यापन से प्रभावित अन्य सहायक अध्यापकों के मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
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