Tuesday, August 18, 2026

न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त, सभी जिलों में बढ़ाने का निर्देश.

Share

झारखंड हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। लातेहार सिविल कोर्ट में अक्टूबर 2022 में हुई हिंसक घटना का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने माना कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा का संबंध न्यायपालिका की स्वतंत्रता से भी जुड़ा हुआ है।

चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान से शुरू की गई जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए मामले का निष्पादन कर दिया।

2022 में लातेहार कोर्ट परिसर में हुई थी हिंसा

10 अक्टूबर 2022 को लातेहार सिविल कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में लोग प्रवेश कर गए थे। इस दौरान प्रदर्शन, नारेबाजी और तोड़फोड़ के साथ पुलिसकर्मियों के साथ भी झड़प हुई थी। घटना के कारण अदालत की कार्यवाही प्रभावित हुई थी।

स्थिति गंभीर होने पर तत्कालीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सुरक्षा कारणों से एक कमरे में सुरक्षित रखना पड़ा था। घटना के अगले दिन हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका शुरू की थी।

ऐसी घटना दोबारा होने का इंतजार नहीं किया जा सकता

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए किसी नई हिंसक घटना का इंतजार नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार न्यायिक अधिकारियों को ऐसा माहौल मिलना जरूरी है, जहां वे किसी भय, दबाव, धमकी या बाहरी हस्तक्षेप के बिना अपने दायित्व निभा सकें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और गरिमा न्यायपालिका की स्वतंत्रता के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हैं।

प्रदर्शन के अधिकार की आड़ में कोर्ट में हिंसा स्वीकार्य नहीं

हाईकोर्ट ने माना कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की सीमा अदालत की कार्यवाही बाधित करने या न्यायिक अधिकारियों और अन्य कर्मियों की सुरक्षा को खतरे में डालने तक नहीं हो सकती।

अदालत ने कोर्ट परिसर में हिंसा और तोड़फोड़ को न्यायिक व्यवस्था की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बताया।

लातेहार कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष

राज्य सरकार की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए गए हलफनामों के आधार पर हाईकोर्ट ने लातेहार सिविल कोर्ट की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को संतोषजनक माना। कोर्ट परिसर में सशस्त्र बलों की तैनाती, आसपास क्विक रिस्पांस टीम और महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा परिसर की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी पर कंटीले तार लगाए गए हैं। संवेदनशील मामलों में हाई रिस्क अंडरट्रायल कैदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेशी की व्यवस्था भी की गई है। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए नामित डीएसपी को जिम्मेदारी दी गई है।

सभी जिलों में बॉडीगार्ड और होमगार्ड की व्यवस्था पर जोर

हाईकोर्ट ने लातेहार में न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराई जा रही व्यक्तिगत सुरक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां प्रत्येक न्यायिक अधिकारी के लिए कम से कम एक बॉडीगार्ड और एक होमगार्ड की व्यवस्था है।

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि राज्य के दूसरे जिलों में तैनात न्यायिक अधिकारियों के लिए भी इसी तरह की व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

लातेहार कोर्ट परिसर की घटना से जुड़े आपराधिक मामले की जांच में 40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई। कुछ अन्य लोगों के खिलाफ जांच जारी है। जांच के दौरान कुछ आरोपियों को सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत नोटिस दिए जाने की बात भी सामने आई। वहीं, मामले में शामिल अज्ञात आरोपियों की पहचान के प्रयास जारी बताए गए।

Read more

Local News