Tuesday, November 3, 2026

नवरात्रि 2026: व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बचें? जानिए जरूरी नियम.

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नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं और अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खानपान के नियमों का पालन करते हैं। व्रत को भक्ति, आत्मसंयम और आत्मचिंतन का माध्यम माना जाता है।

हालांकि, नवरात्रि के व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं। ऐसे में व्रत रखने से पहले अपनी परंपरा के नियमों को समझना और सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि के दौरान क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।

नवरात्रि के व्रत में क्या करें?

1. पूजा-पाठ और प्रार्थना के लिए समय निकालें

नवरात्रि में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और ध्यान के जरिए अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करें और दिन में कुछ समय शांत मन से प्रार्थना के लिए निकालें।

2. व्रत के अनुकूल भोजन चुनें

व्रत के दौरान कई लोग फल, दूध, दही, मेवे, आलू, शकरकंद और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खाते हैं। भोजन की सामग्री का चुनाव अपनी परंपरा के अनुसार करें। लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने के लिए संतुलित मात्रा में भोजन करना भी जरूरी है।

3. पर्याप्त पानी पिएं

उपवास के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। अपनी व्रत परंपरा के अनुसार पर्याप्त पानी पिएं। यदि फलाहार की अनुमति हो, तो फल और अन्य तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं।

4. सेंधा नमक का इस्तेमाल करें

कई परिवारों में नवरात्रि के व्रत के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, यह नियम सभी परंपराओं में एक जैसा नहीं होता। नमक का सेवन भी संतुलित मात्रा में करें।

5. भोजन की साफ-सफाई का ध्यान रखें

व्रत के लिए खाना बनाते समय रसोई, बर्तनों और खाद्य सामग्री की स्वच्छता बनाए रखें। ताजा भोजन तैयार करें और लंबे समय तक बाहर रखे खाद्य पदार्थों को खाने से बचें।

6. व्रत खोलते समय संयम बरतें

लंबे समय तक उपवास रखने के बाद एक साथ बहुत अधिक भोजन करने के बजाय थोड़ी मात्रा से शुरुआत करें। फल या हल्का भोजन लेने के बाद अपनी भूख और सहनशीलता के अनुसार सामान्य भोजन करें।

7. प्रसाद, दान और सेवा को दें महत्व

नवरात्रि में पूजा के बाद प्रसाद चढ़ाने और बांटने की परंपरा है। इस दौरान जरूरतमंदों की मदद करना, दान देना और दूसरों के प्रति सहयोग की भावना रखना भी त्योहार के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

8. मन की शांति और सकारात्मक व्यवहार पर ध्यान दें

व्रत के दौरान पूजा-पाठ के साथ धैर्य, विनम्रता और दयालुता अपनाने का प्रयास करें। परिवार और समाज के लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना भी इस पर्व की भावना से जुड़ा है।

नवरात्रि के व्रत में किन चीजों से बचें?

1. अनाज और दालों को लेकर अपनी परंपरा के नियम जानें

कई लोग व्रत में गेहूं, चावल और दालों का सेवन नहीं करते। उनकी जगह कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि, व्रत के नियम सभी जगह समान नहीं हैं।

2. प्याज और लहसुन से परहेज

कई धार्मिक परंपराओं में नवरात्रि के दौरान प्याज और लहसुन नहीं खाया जाता। यदि आपके परिवार में भी यह नियम प्रचलित है, तो भोजन तैयार करते समय इसका ध्यान रखें।

3. मांसाहारी भोजन और नशीले पदार्थों से दूरी

कई श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान मांस, मछली और अंडे का सेवन नहीं करते। इस अवधि में शराब और तंबाकू से दूर रहना भी स्वास्थ्य के लिहाज से लाभकारी है।

4. बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन न खाएं

व्रत में कुट्टू की पूरी, पकौड़े, चिप्स और मिठाइयों का अधिक सेवन करने से बचें। तली-भुनी चीजों की अधिक मात्रा से पेट में भारीपन और असहजता हो सकती है। जहां संभव हो, कम तेल में तैयार भोजन चुनें।

5. अत्यधिक मीठे और पैकेट वाले खाद्य पदार्थ सीमित रखें

व्रत के दौरान बाजार में मिलने वाले मीठे और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने के बजाय ताजे फल और घर पर बने व्यंजन चुनना बेहतर है। गुड़ और शहद भी चीनी के स्रोत हैं, इसलिए इनका सेवन भी सीमित मात्रा में करें।

6. लंबे समय तक भूखे रहने के बाद जरूरत से ज्यादा न खाएं

व्रत के दौरान भोजन करने की अनुमति होने पर नियमित अंतराल पर पर्याप्त फलाहार लें। उपवास खोलते समय जरूरत से ज्यादा खाना पेट की परेशानी बढ़ा सकता है।

7. सेहत से जुड़े संकेतों को नजरअंदाज न करें

व्रत के दौरान कमजोरी, चक्कर या अस्वस्थता महसूस होने पर इसे अनदेखा न करें। जरूरत पड़ने पर उपवास रोककर चिकित्सकीय सलाह लें।

व्रत रखते समय सेहत का ध्यान रखना क्यों जरूरी है?

उपवास का तरीका हर व्यक्ति की उम्र, दिनचर्या और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मधुमेह या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को उपवास रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं में बदलाव करना या पानी से भी परहेज करना नुकसानदेह हो सकता है।

नवरात्रि के व्रत में सबसे जरूरी बात

नवरात्रि का उद्देश्य केवल खानपान पर नियंत्रण रखना नहीं, बल्कि भक्ति, आत्मसंयम और सकारात्मक व्यवहार को भी महत्व देना है। व्रत के नियम क्षेत्र और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए स्वास्थ्य और शरीर की जरूरतों का भी ध्यान रखें। किसी विशेष नियम को लेकर भ्रम होने पर परिवार के जानकार सदस्य या धार्मिक विद्वान से सलाह ली जा सकती है।

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