Friday, July 31, 2026

धनबाद कोर्ट में पेशी के बाद जयराम महतो का सरकार और जांच एजेंसियों पर हमला, JPSC आंदोलन पर भी बोले.

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धनबाद: झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख जयराम महतो शुक्रवार को सियालजोरी स्थित इलेक्ट्रो स्टील प्लांट से जुड़े धरना-प्रदर्शन मामले में धनबाद व्यवहार न्यायालय पहुंचे। अदालत में निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अपने खिलाफ दर्ज मामले, JPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और धनबाद सांसद ढुल्लू महतो को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

धरना मामले में खुद को बताया बेगुनाह

जयराम महतो ने कहा कि जिस आंदोलन से संबंधित मामला दर्ज किया गया है, उस दौरान वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। उनका आरोप था कि केवल पोस्टरों में तस्वीर होने के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से लोगों की आवाज उठाना अपराध नहीं माना जाना चाहिए और वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए जांच में सहयोग कर रहे हैं।

JPSC आंदोलन को लेकर छात्रों के फैसले का सम्मान

रांची में चल रहे JPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन पर उन्होंने कहा कि छात्रों ने शुरुआत से ही आंदोलन को गैर-राजनीतिक बनाए रखने का निर्णय लिया था। इसी वजह से उन्होंने मंच साझा नहीं किया, लेकिन अभ्यर्थियों की मांगों के प्रति अपना समर्थन जारी रखा। उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो की भी सराहना करते हुए कहा कि वे छात्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा रहे हैं।

ED की कार्रवाई पर उठाए सवाल

धनबाद में हाल में हुई ED की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम महतो ने कहा कि यदि किसी ने अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की है तो उसके खिलाफ जांच होना स्वाभाविक है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए।

ढुल्लू महतो पर राजनीतिक टिप्पणी

धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो का नाम लेते हुए जयराम महतो ने राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की संभावना कम रहती है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों को सभी मामलों में समान मानदंड अपनाने चाहिए और किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक आधार पर राहत नहीं मिलनी चाहिए।

जयराम महतो के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं, जांच एजेंसियों की भूमिका और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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