रांची: दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए झारखंड पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का सहारा लेने की तैयारी कर रही है। इस पहल के तहत भीड़ का आकलन करने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और मेले या पूजा पंडालों में बिछड़े बच्चों को खोजने में तकनीक की मदद ली जा सकती है।
पुलिस की योजना पूजा पंडालों, प्रमुख सड़कों और भीड़भाड़ वाले चौक-चौराहों पर निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की है। हालांकि, राज्य में कितने स्थानों पर AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल होगा और किन जिलों में इसकी सुविधा उपलब्ध रहेगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
AI तकनीक के इस्तेमाल को लेकर जिलों को निर्देश
आईजी अभियान सह पुलिस प्रवक्ता नरेंद्र सिंह के अनुसार, दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध AI सॉफ्टवेयर और टैबलेट आधारित तकनीक का उपयोग करने के लिए कहा गया है। उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
रांची के साथ धनबाद और जमशेदपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर तैयारी की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
भीड़ बढ़ने पर समय रहते मिलेगी जानकारी
दुर्गा पूजा के दौरान प्रमुख पंडालों और सड़कों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अचानक भीड़ बढ़ने पर यातायात प्रभावित होने और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा होने की आशंका रहती है।
AI आधारित निगरानी प्रणाली उपलब्ध होने पर किसी क्षेत्र में भीड़ की स्थिति का अनुमान लगाने और अधिक दबाव वाले स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इससे पुलिस को अतिरिक्त जवानों की तैनाती, यातायात नियंत्रण और निगरानी बढ़ाने जैसे फैसले लेने में सहूलियत होगी।
हालांकि, इस तरह की सुविधा की प्रभावशीलता कैमरों की उपलब्धता, सिस्टम की क्षमता और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के समन्वय पर निर्भर करेगी।
कैमरों से संदिग्धों की पहचान में मिलेगी सहायता
AI आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए कैमरों में दर्ज चेहरों का पुलिस के उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी से मिलता है, तो सिस्टम पुलिस को संभावित मिलान का संकेत दे सकता है।
इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की जांच में सहायता मिल सकती है। हालांकि, केवल चेहरे का मिलान किसी व्यक्ति के अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस को अन्य तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी होगी।
लापता बच्चों को खोजने में भी उपयोगी हो सकती है तकनीक
पूजा पंडालों और मेलों में भीड़ के कारण बच्चे कभी-कभी अपने परिजनों से बिछड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में AI आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम मददगार हो सकता है।
यदि लापता बच्चे की तस्वीर उपलब्ध हो और निगरानी कैमरों का संबंधित सिस्टम से तकनीकी जुड़ाव हो, तो फुटेज में उससे मिलते-जुलते चेहरे तलाशने में सहायता मिल सकती है। इससे तलाश की प्रक्रिया तेज करने में मदद मिलने की संभावना है।
हालांकि, तकनीक की सफलता कैमरों की गुणवत्ता, तस्वीरों की स्पष्टता और सिस्टम के सही तरीके से काम करने पर निर्भर करेगी।
श्रावणी मेले में भी हुआ था AI कंट्रोल रूम का इस्तेमाल
आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने बताया कि देवघर में श्रावणी मेले के दौरान AI आधारित कंट्रोल रूम का इस्तेमाल किया गया था। उनके अनुसार, इस तकनीक से भीड़ का आकलन करने, संदिग्ध चेहरों की पहचान में सहायता लेने और लापता बच्चों को खोजने जैसे कार्यों में मदद मिली।
पुलिस के मुताबिक, श्रावणी मेले के अनुभव को देखते हुए दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान भी ऐसी तकनीक का उपयोग सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
सुरक्षा के साथ निगरानी व्यवस्था भी अहम
दुर्गा पूजा और दशहरा जैसे बड़े आयोजनों में तकनीक के साथ पुलिस की प्रत्यक्ष निगरानी, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सहायता व्यवस्था भी महत्वपूर्ण रहती है। AI आधारित सिस्टम से मिलने वाली जानकारी पर समय रहते कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है।
राज्य में इस बार तकनीक का इस्तेमाल किन स्थानों पर और किस स्तर पर किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी वास्तविक पहुंच का आकलन किया जा सकेगा।
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