Monday, July 6, 2026

दिल्ली के भारत मंडपम में 17वां टॉय बिज इंटरनेशनल B2B एक्सपो 2026 शुरू हुआ.

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भारत ने वैश्विक खिलौना निर्माता हब बनने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया, क्योंकि शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में 17वां टॉय बिज इंटरनेशनल B2B एक्सपो 2026 शुरू हुआ. चार दिन के इस इवेंट का उद्घाटन केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने किया.

इस एक्सपो में सैकड़ों भारतीय खिलौना निर्माता, निर्यातक, खरीदार और उद्योग विशेषज्ञ एक ही छत के नीचे आए हैं. शैक्षणिक और STEM खिलौनों से लेकर पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तक, यह प्रदर्शनी मेड-इन-इंडिया खिलौना उद्योग की ताकत और नवाचार को दिखाती है.

कार्यक्रम में बोलते हुए, पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के खिलौना क्षेत्र में हाल के वर्षों में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसे जरूरी BIS क्वालिटी स्टैंडर्ड और मेक इन इंडिया अभियान जैसी सरकारी पहलों से समर्थन मिला है. उन्होंने उद्योगों से भारतीय खिलौनों को दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए गुणवत्ता, नवाचार और निर्यात पर फोकस करने को कहा.

टॉय बिज एक्सपो 2026 में प्रदर्शनी के लिए रखे खिलौने

उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में भारत और 50 से ज्यादा देशों से हजारों बिजनेस विजिटर (व्यापारियों के) आने की उम्मीद है, जिससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार के नए मौके मिलेंगे.

‘क्वालिटी प्रोडक्ट्स भारत को ग्लोबल लीडर बनाएंगे’
गोयल ने कहा कि भारत ने पहले ही बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं, भारत में बनी कारें अब दुनिया भर में निर्यात की जा रही हैं. उन्होंने खिलौना निर्माताओं को उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने के लिए बढ़ावा दिया और कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद भारत को ग्लोबल मार्केट में अधिक सफलता दिलाने में मदद करेंगे.

टॉय बिज एक्सपो 2026 में प्रदर्शनी के लिए रखे खिलौने

उन्होंने कहा कि खिलौना उद्योग न सिर्फ अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा कर रहा है. उन्होंने भारतीय विनिर्माताओं का समर्थन करते हुए संतुलित आर्थिक विकास बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल ने खिलौना विनिर्माताओं से ब्रांडिंग और मार्केटिंग में निवेश करने की अपील की. ​​उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को दिल्ली तक ही सीमित रहने के बजाय विदेश में प्रदर्शनी लगानी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार शुरुआती वर्षों में गोदाम सुविधा (Warehouse Facility) में मदद करके निर्यातकों की सहायता करने के लिए तैयार है, जिससे विदेशी ग्राहकों को उत्पादों की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हो सके.

उन्होंने इंडियन टॉय एसोसिएशन को अपनी मेंबरशिप को मौजूदा 2,100 रजिस्टर्ड सदस्यों से आगे बढ़ाने के लिए भी बढ़ावा दिया, जिसमें और छोटे और मध्यम श्रेणी के विनिर्माताओं को शामिल किया जाए. गोयल ने कहा कि सरकार ट्रेड उपायों के जरिये भारतीय कंपनियों को गलत आयात से बचाती रहेगी.

ग्लोबल खिलौना बाजार में 5% हिस्सेदारी का लक्ष्य
सतत विनिर्माण की बढ़ती वैश्विक मांग पर जोर देते हुए, गोयल ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2032 तक वैश्विक खिलौना बाजार में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है, जिसके लिए लगभग 25 गुना वृद्धि की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए मिलकर कोशिश करने और पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खिलौना उद्योग को बढ़ाने की जरूरत होगी.

संपूर्ण खिलौना निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
मंत्री गोयल ने कहा कि भारत को असेंबली (अलग-अलग पुर्जों को जोड़कर उत्पाद तैयार करना) से आगे बढ़कर एक पूरा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाना चाहिए. उन्होंने सप्लाई चेन को मजबूत करने, विनिर्माण लागत कम करने और भारत को खिलौना उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश में ही मोटर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे पार्ट्स बनाने की जरूरत पर जोर दिया.

उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का खिलौना निर्यात बढ़कर लगभग 5,000 करोड़ रुपये हो गया है. हालांकि, दूसरे देशों की तुलना में भारत का निर्यात अभी भी काफी कम है. पहले भारत के घरेलू बाजार में बिकने वाले खिलौनों में से लगभग 80 प्रतिशत खिलौने आयात किए जाते थे, जबकि भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी सिर्फ 20 प्रतिशत थी. आज, आयात किए गए खिलौनों की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है, जो घरेलू विनिर्माण में काफी बढ़ोतरी दिखाता है.

भारतीय खिलौना बाजार में अपार संभावनाएं
चीन, ताइवान और हांगकांग के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय कंपनियों के साथ बिजनेस के मौके तलाशने के लिए प्रदर्शनी में हिस्सा लिया. नई दिल्ली में टॉय बिज एक्सपो के दौरान चाइना टॉय एंड जुवेनाइल प्रोडक्ट्स एसोसिएशन की प्रमुख माय लियांग (May Liang) ने कहा, “भारत के टॉय मार्केट में वृद्धि की अच्छी संभावना है क्योंकि यहां बड़ी युवा जनसंख्या है.”

लियांग ने कहा कि भारत में हर साल दो करोड़ से ज्यादा बच्चे पैदा होते हैं, जिससे यह वैश्विक खिलौना उद्योग के लिए एक बड़ा बाजार बन गया है. उन्होंने इस प्रदर्शनी को इंडियन टॉय फेयर में अपनी पहली विजिट बताया और इंडियन टॉय एसोसिएशन और अपने संगठन के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंध की तारीफ की. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, खासकर राइड-ऑन खिलौनों के क्षेत्र में.

खिलौनों का BIS सर्टिफिकेशन
भारत में बिकने वाले खिलौनों की गुणवत्ता और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए, केंद्र सरकार ने खिलौना (गुणवत्ता नियंत्रण) आदेश 2020 के तहत ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) सर्टिफिकेशन जरूरी कर दिया. यह आदेश 25 फरवरी, 2020 को अधिसूचित किया गया था, और COVID-19 की वजह से 1 जनवरी, 2021 से लागू हुआ. नियमों के तहत, 14 साल से कम उम्र के बच्चों के सभी इलेक्ट्रिक और नॉन-इलेक्ट्रिक खिलौनों पर BIS द्वारा जारी ISI मार्क होना चाहिए, तभी उन्हें भारत में बनाया, आयात या बेचा जा सकता है.

टिकाऊपन और बच्चों की सुरक्षा पर फोकस
क्रिएटिव किड्स के मालिक मनीष कुमार शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी ऐसे खिलौने डिजाइन करती है जो भारतीय संस्कृति को दिखाते हैं. टिकाऊपन के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि कंपनी सभी BIS गाइडलाइंस का पालन करती है और उनके पास BIS लाइसेंस है. उन्होंने बताया कि कंपनियां सर्टिफिकेशन मिलने से पहले सख्त गुणवत्ता जांच से गुजरती हैं.

टॉय बिज एक्सपो 2026 में प्रदर्शनी के लिए रखे खिलौने

उन्होंने फूड-ग्रेड मटीरियल इस्तेमाल करने की अहमियत पर भी जोर दिया, क्योंकि छोटे बच्चे अक्सर खिलौने अपने मुंह में डाल लेते हैं. फूड-ग्रेड मटीरियल लेड, BPA, और थैलेट्स जैसे नुकसानदायक पदार्थों के संपर्क में आने से बचाते हैं. शर्मा ने कहा कि भारतीय खिलौना उद्योग में काफी बढ़ोतरी हुई है. पहले, ज्यादातर खिलौने चीन से आयात किए जाते थे, लेकिन सरकारी पॉलिसी ने भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए अधिक मौके बनाए हैं, जिससे बेहतर गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट्स बन रहे हैं.

AI-पावर्ड खिलौने
प्ले क्राफ्ट के पार्टनर राजेश अरोड़ा ने कहा कि AI वाले खिलौने तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि आज बच्चे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ बड़े हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये खिलौने बच्चों को अल्फाबेट, कहानियां, स्वस्थ खाने की आदतें और दूसरे शुरुआती जीवन कौशल सीखने में मदद करते हैं. उन्होंने एजुकेशनल स्क्रीन-फ्री फोन के बारे में भी बताया जो बच्चों को स्क्रीन टाइम बढ़ाए बिना भाषाएं सीखने में मदद करते हैं. अरोड़ा ने कहा कि AI अपनाने का उद्देश्य बच्चों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाना है, साथ ही स्मार्टफोन पर उनकी निर्भरता कम करना है.

ई-कॉमर्स से खिलौना निर्माताओं के लिए अवसर बढ़े
खिलौना उद्योग में तीसरी पीढ़ी के उद्यमी गौतम अरोड़ा ने कहा कि Amazon और Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने भारत के खिलौना बाजार को बदल दिया है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के आने से पहले, भारत और विदेश में ग्राहकों तक पहुंचने के लिए वर्षों के निवेश और एक बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की जरूरत होती थी. आज, छोटे टॉय ब्रांड भी ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिये बहुत कम निवेश में पूरे देश में बेच सकते हैं.

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