नई दिल्ली: देश के असंगठित क्षेत्र के सबसे बड़े कार्यबल में से एक, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने आज देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. ‘गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ (GIPSWU) ने आज शनिवार को दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 PM बजे तक सभी ऐप-आधारित सेवाओं को पूरी तरह बंद रखने का आह्वान किया है. यूनियन की मुख्य मांग है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सभी डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के लिए न्यूनतम सेवा पारिश्रमिक ₹20 प्रति किलोमीटर तय किया जाए.
4 साल बाद सबसे बड़ी तेल बढ़ोतरी, 1.2 करोड़ कामगार प्रभावित
यूनियन के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में की गई लगभग ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी इस आंदोलन की मुख्य वजह है. करीब चार वर्षों में हुई इस पहली सबसे बड़ी देशव्यापी तेल वृद्धि ने लगभग 1.2 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर सीधा और असहनीय वित्तीय बोझ डाल दिया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष को इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है.
भीषण गर्मी और महंगाई की दोहरी मार
GIPSWU की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि पहले से ही महंगी घरेलू एलपीजी और लगातार बढ़ती जीवनयापन लागत से जूझ रहे कामगारों के लिए अब वाहनों का परिचालन खर्च उठाना असंभव हो गया है. उन्होंने विशेष रूप से स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसी त्वरित-कॉमर्स और खाद्य वितरण कंपनियों के साथ-साथ ओला, उबर और रैपिडो के राइडर्स का मुद्दा उठाया. सीमा सिंह ने चेतावनी दी कि यह कार्यबल इस समय देश के कई हिस्सों में चल रही भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच लंबी अवधि तक काम कर रहा है. यदि तत्काल न्यूनतम किराया संशोधित नहीं किया गया, तो लाखों कामगार इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे.
इन सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर
इस 5 घंटे की हड़ताल के कारण आज महानगरों और बड़े शहरों में आम जनजीवन और लॉजिस्टिक्स चेन प्रभावित होने की आशंका है. निम्नलिखित प्रमुख सेवाएं दोपहर से शाम तक बाधित रह सकती हैं:
- फूड एवं ग्रोसरी डिलीवरी: जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, जेप्टो, और इंस्टामार्ट.
- राइड-हेलिंग और कैब सेवाएं: ओला, उबर, और रैपिडो.
- लॉजिस्टिक्स: पोर्टर और अमेज़न फ्लेक्स.
दिसंबर 2025 के आंदोलन के बाद फिर बढ़ा टकरा
वयह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में असंतोष देखा गया है. इससे पहले दिसंबर 2025 में भी डिलीवरी और राइड-हेलिंग कर्मचारियों ने 10-मिनट की असुरक्षित डिलीवरी प्रणाली, गिरते इंसेंटिव और सामाजिक सुरक्षा के अभाव को लेकर एक बड़ा देशव्यापी प्रदर्शन किया था. वर्तमान हड़ताल डिजिटल एग्रीगेटर कंपनियों और सरकार दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है.


