रांची/बांकुड़ा: माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को एक अहम सफलता मिली है। पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में तीन माओवादी नेताओं ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, तीनों लंबे समय से माओवादी संगठन से जुड़े हुए थे और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ झारखंड के कुछ इलाकों में भी सक्रिय रहे हैं। तीनों ने पुलिस के समक्ष अपने हथियार जमा किए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान जाबा महतो, नयनतारा साहू उर्फ मीता और रामप्रसाद मंडी उर्फ सचिन के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि जाबा महतो और नयनतारा साहू माओवादी संगठन की जोनल कमेटी से जुड़ी रही हैं, जबकि रामप्रसाद मंडी को बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्र की रीजनल कमेटी से जुड़ा बताया गया है।
बांकुड़ा में पुलिस के सामने किया सरेंडर
तीनों माओवादियों ने बुधवार को बांकुड़ा पुलिस लाइन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल पुलिस के एडीजी आनंद कुमार और बांकुड़ा के पुलिस अधीक्षक पीवीजी सतीश समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। आत्मसमर्पण के दौरान तीनों ने अपने पास मौजूद हथियार और गोला-बारूद पुलिस को सौंपे।
रिपोर्टों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले तीनों माओवादी लंबे समय से भूमिगत गतिविधियों में शामिल थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उनका सक्रिय क्षेत्र पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर से लेकर झारखंड के कोल्हान क्षेत्र तक फैला हुआ था। इस वजह से इस आत्मसमर्पण को झारखंड और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं आत्मसमर्पण करने वाले तीनों माओवादी?
पुलिस के मुताबिक, जाबा महतो उर्फ बुलु/गौरी और नयनतारा साहू उर्फ मीता/झूमा माओवादी संगठन की जोनल कमेटी से जुड़ी थीं। वहीं रामप्रसाद मंडी उर्फ सचिन/महादेव को रीजनल कमेटी का सदस्य बताया गया है। विभिन्न रिपोर्टों में रामप्रसाद को बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्र में सक्रिय संगठनात्मक ढांचे से जोड़ा गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तीनों के खिलाफ पश्चिम बंगाल और झारखंड के अलग-अलग थानों में बड़ी संख्या में मामले दर्ज हैं। रिपोर्टों में इन मामलों की संख्या 75 से 80 के आसपास बताई गई है। इनमें हत्या के मामलों के अलावा हथियार, विस्फोटक और यूएपीए से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज मामले भी शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, आत्मसमर्पण के बाद भी उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। पश्चिम बंगाल पुलिस के अधिकारी ने भी कहा है कि आत्मसमर्पण से आपराधिक मामलों की कार्यवाही समाप्त नहीं होगी और उनसे पूछताछ की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
हथियार और गोला-बारूद भी किए जमा
आत्मसमर्पण के दौरान तीनों ने हथियार पुलिस को सौंपे। अलग-अलग रिपोर्टों में बरामद हथियारों की संख्या में कुछ अंतर बताया गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों ने एक AK-47 और INSAS राइफलें समेत हथियार पुलिस को सौंपे। वहीं जागरण की रिपोर्ट में दो INSAS राइफल, एक AK-47, 10 मैगजीन और 154 कारतूस जमा किए जाने की जानकारी दी गई है।
पुलिस का कहना है कि इनमें से कुछ हथियार पहले सुरक्षा बलों से लूटे गए होने की बात सामने आई है। हथियारों की पहचान और उनके पुराने मामलों से संबंध की जांच पुलिस की ओर से की जा रही है।
इस बरामदगी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हथियारों की जांच से माओवादी नेटवर्क की गतिविधियों और पुराने मामलों के संबंध में पुलिस को अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है।
करीब दो दशक से सक्रिय होने का दावा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले तीनों लोग लंबे समय से माओवादी संगठन से जुड़े रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि तीनों 2006-07 के आसपास से संगठन की गतिविधियों में सक्रिय थे।
इस लंबे सक्रिय काल के दौरान उनका प्रभाव बंगाल के जंगलमहल इलाके और झारखंड के कुछ क्षेत्रों तक रहा। पुलिस के मुताबिक, तीनों की गतिविधियों का दायरा बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर से लेकर झारखंड के कोल्हान क्षेत्र तक बताया गया है।
झारखंड से क्या है कनेक्शन?
तीनों में से रामप्रसाद मंडी को झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले से जुड़ा बताया गया है। इससे इस आत्मसमर्पण का झारखंड से सीधा संबंध सामने आता है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि तीनों की गतिविधियां झारखंड के कोल्हान इलाके तक फैली हुई थीं।
झारखंड में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों के अभियान के बीच इन तीनों का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इससे सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के बारे में जानकारी मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
हालांकि, आत्मसमर्पण को केवल झारखंड पुलिस की कार्रवाई के रूप में देखना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आत्मसमर्पण पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष हुआ। लेकिन आत्मसमर्पण करने वालों की गतिविधियां झारखंड के क्षेत्रों तक भी जुड़ी रही हैं।
इनामी माओवादियों ने भी डाले हथियार
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले तीनों पर झारखंड सरकार की ओर से इनाम घोषित था। यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के मुताबिक, रामप्रसाद मंडी पर 15 लाख रुपये, नयनतारा साहू पर 10 लाख रुपये और जाबा महतो पर एक लाख रुपये का इनाम बताया गया है।
इससे पहले भी तीनों के आत्मसमर्पण से जुड़ी खबरें सामने आई थीं। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट में रामप्रसाद मंडी, उनकी पत्नी नयनतारा और जाबा महतो के इनामी माओवादी होने की जानकारी दी गई थी।
आत्मसमर्पण नीति के तहत आगे की प्रक्रिया
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास संबंधी प्रक्रिया भी लागू हो सकती है। यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल पुलिस के एडीजी आनंद कुमार के हवाले से बताया गया है कि मौजूदा आत्मसमर्पण नीति के तहत उनके पुनर्वास की प्रक्रिया के लिए उन्हें संबंधित स्क्रीनिंग कमेटी के सामने पेश किया जाएगा। साथ ही उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
इसका मतलब यह है कि आत्मसमर्पण करने के बाद भी पुराने आपराधिक मामलों की जांच और अदालत से जुड़ी प्रक्रिया अपने स्तर पर चलती रहेगी। पुलिस उनसे संगठन की गतिविधियों, नेटवर्क और पुराने मामलों से जुड़े पहलुओं पर भी पूछताछ कर सकती है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्यों का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों को संगठन की जमीनी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने का अवसर देता है। खासकर जब आत्मसमर्पण करने वाले लोग लंबे समय तक किसी क्षेत्र में सक्रिय रहे हों, तब उनसे संगठन के नेटवर्क, ठिकानों, संपर्कों और हथियारों से जुड़े मामलों की जानकारी हासिल की जा सकती है।
बांकुड़ा में हुए इस आत्मसमर्पण में दो महिलाएं और एक पुरुष माओवादी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, तीनों अलग-अलग संगठनात्मक स्तरों पर सक्रिय रहे हैं। इसलिए जांच एजेंसियों की नजर अब इस बात पर भी हो सकती है कि इनके आत्मसमर्पण के बाद इनके संपर्क में रहे अन्य सदस्यों और नेटवर्क के बारे में क्या जानकारी सामने आती है।
आगे क्या होगा?
पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के बाद अब तीनों से पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस उनके खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करेगी और हथियारों की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि बरामद हथियार किन पुराने मामलों से जुड़े हैं और लंबे समय तक इन्हें कहां तथा किस नेटवर्क के जरिए रखा गया था।
साथ ही, पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं और पात्रता पर भी संबंधित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपनी जगह जारी रहेगी।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में तीन माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण से सुरक्षा एजेंसियों को महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। आत्मसमर्पण करने वालों में जाबा महतो, नयनतारा साहू और रामप्रसाद मंडी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, जाबा और नयनतारा जोनल कमेटी से तथा रामप्रसाद रीजनल कमेटी से जुड़े रहे हैं। तीनों की गतिविधियां पश्चिम बंगाल के कई जिलों के साथ झारखंड के कोल्हान क्षेत्र तक बताई गई हैं।
आत्मसमर्पण के दौरान हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे गए। पुलिस अब हथियारों की जांच के साथ-साथ तीनों के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों और माओवादी नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच आगे बढ़ाएगी। आत्मसमर्पण के बावजूद आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी रह
