Thursday, October 29, 2026

झोपड़ी में रहकर प्रिंस ने हासिल किया बड़ा मुकाम, उज्बेकिस्तान में 33 देशों के खिलाड़ियों से लेंगे टक्कर.

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भागलपुर | 29 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News

कहते हैं कि मजबूत इरादों के सामने मुश्किलें भी रास्ता छोड़ देती हैं। बिहार के भागलपुर के रहने वाले प्रिंस कुमार ने अपनी मेहनत और लगन से इसे सच साबित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। परबत्ती इलाके की एक छोटी-सी झोपड़ी में रहने वाले प्रिंस का चयन पेनचक सिलाट की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। उज्बेकिस्तान में होने वाली इस प्रतियोगिता में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जहां 33 देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।

प्रिंस का सपना अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर देश का नाम रोशन करना है। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आर्थिक तंगी, कठिन अभ्यास, चोट और पढ़ाई की चुनौतियों से भरा रहा है।

नाश्ते की दुकान चलाते हैं पिता

प्रिंस के पिता दीपक मंडल नाश्ते की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दुकान से होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण बेटे के प्रशिक्षण और खेल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं है।

इसके बावजूद परिवार ने प्रिंस के सपने को आगे बढ़ाने में सहयोग किया है। पिता अपनी क्षमता के अनुसार बेटे की जरूरतें पूरी करने की कोशिश करते हैं, ताकि आर्थिक परेशानियां उसकी तैयारी में बाधा न बनें।

रोजाना चार घंटे अभ्यास, साथ में 12वीं की तैयारी

प्रिंस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए प्रतिदिन करीब चार घंटे अभ्यास करते हैं। इसके साथ ही उन्हें 12वीं की परीक्षा की तैयारी भी करनी है। खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती है।

अभ्यास के दौरान चोट लगने और खानपान से जुड़ी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है। लेकिन प्रिंस का कहना है कि परिवार और कोच के सहयोग से वह इन मुश्किलों से निपटते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

पेनचक सिलाट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे प्रिंस

पेनचक सिलाट इंडोनेशिया से जुड़ी मार्शल आर्ट विधा है। इसमें खिलाड़ी किक, पंच और अन्य तकनीकों के माध्यम से मुकाबला करते हैं। इस खेल की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चयन होना प्रिंस के लिए बड़ी उपलब्धि है।

प्रिंस ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उनका लक्ष्य प्रतियोगिता में पदक जीतकर भारतीय तिरंगे का मान बढ़ाना है।

कोच कुंदन ने मेहनत और लगन को बताया सफलता की वजह

प्रिंस के कोच कुंदन के अनुसार, वह एक मेहनती और समर्पित खिलाड़ी हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और अपने खेल को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।

कोच ने बताया कि किलकारी के माध्यम से प्रिंस को प्रशिक्षण का अवसर मिला, जिससे उनकी प्रतिभा को निखारने में मदद मिली। उनके मुताबिक, सीमित संसाधनों वाले बच्चों को खेल में आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ उनका और उनके अभिभावकों का मनोबल बनाए रखना भी जरूरी है।

कोच को उम्मीद है कि प्रिंस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। उनके अनुसार, प्रिंस पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं और खेल सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।

पिता को बेटे से पदक की उम्मीद

दीपक मंडल का कहना है कि बेटे का अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन होना उनके लिए खुशी की बात है। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद वह प्रिंस की जरूरतें पूरी करने का प्रयास करते हैं। साथ ही, वह चाहते हैं कि बेटा खेल के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखे।

परिवार को उम्मीद है कि प्रिंस उज्बेकिस्तान में बेहतर प्रदर्शन कर भारत के लिए पदक जीतेंगे।

आर्थिक सहायता की जरूरत, सरकार से मदद की उम्मीद

प्रिंस के परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। खबर के मुताबिक, प्रिंस ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर आर्थिक सहायता के लिए पत्र भी दिया है, लेकिन परिवार को अब तक जवाब मिलने की जानकारी नहीं है।

परिवार चाहता है कि सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे आए, ताकि आर्थिक तंगी उनकी तैयारी और खेल में आगे बढ़ने के अवसरों को प्रभावित न करे।

प्रिंस की कहानी सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करने की मिसाल है। अब उनकी नजर उज्बेकिस्तान में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता पर है, जहां वह अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करना चाहते हैं।

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