Friday, October 23, 2026

झारखंड हाईकोर्ट ने अफीम तस्करी के दो दोषियों की सजा 8 से घटाकर 3 साल की.

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने अफीम तस्करी से जुड़े एक मामले में दो दोषियों को राहत देते हुए उनकी सजा आठ साल से घटाकर तीन साल कर दी है। हालांकि, अदालत ने दोनों की दोषसिद्धि बरकरार रखी है। साथ ही, प्रत्येक पर लगाया गया 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी कायम रखा गया है।

यह फैसला राज कुमार साव उर्फ राजू कुमार और नगिना उर्फ नकुल यादव की ओर से दायर अलग-अलग आपराधिक अपीलों पर सुनवाई के बाद आया। दोनों ने लातेहार के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत के 4 मार्च 2025 के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

वाहन जांच के दौरान दो किलो अफीम मिलने का मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 2 मई 2016 की है। उस दिन हेरहंज थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान वाहन जांच के समय मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया।

पुलिस का दावा था कि मोटरसाइकिल की सीट पर रखे कपड़े के थैले से दो किलो अफीम बरामद हुई थी। पूछताछ के दौरान दोनों ने कथित तौर पर बताया था कि उन्होंने पांकी थाना क्षेत्र के केकरगढ़ गांव से अफीम खरीदी थी और उसे बेचने के लिए चतरा जा रहे थे।

इस मामले में हेरहंज थाना कांड संख्या 09/2016 दर्ज किया गया था। सुनवाई के बाद निचली अदालत ने दोनों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 17(बी) के तहत दोषी ठहराते हुए आठ-आठ साल के सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में एक-एक साल के अतिरिक्त सश्रम कारावास का भी प्रावधान था।

बचाव पक्ष ने जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने बरामदगी और जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उसकी ओर से दलील दी गई कि मामले में सभी गवाह पुलिसकर्मी थे और कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया था।

बचाव पक्ष ने जब्ती सूची तैयार करने, अफीम का वजन करने और दोनों आरोपियों को पकड़े जाने की परिस्थितियों के संबंध में गवाहों के बयानों में अंतर होने की बात कही। जब्त पदार्थ को मालखाने में जमा करने और अदालत में पेश करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। इसके अतिरिक्त, मोटरसाइकिल के स्वामित्व से जुड़े ठोस साक्ष्य नहीं होने की दलील दी गई।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों आरोपी युवा हैं, यह उनका पहला अपराध बताया गया है और वे मुकदमे के दौरान करीब डेढ़ साल जेल में रह चुके हैं। वर्ष 2016 से मुकदमे का सामना करने के कारण उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

दोषसिद्धि बरकरार, सजा की अवधि में कटौती

हाईकोर्ट ने दोनों की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कारावास की अवधि आठ साल से घटाकर तीन साल कर दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले में सजा बढ़ाने वाले कोई प्रतिकूल कारक सामने नहीं आए और दोनों दोषी युवा हैं।

हालांकि, अदालत ने जुर्माने की राशि में कोई बदलाव नहीं किया। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना बरकरार रहेगा।

इस फैसले में अदालत ने दोषसिद्धि और सजा की अवधि को अलग-अलग पहलुओं के रूप में देखा। दोषसिद्धि कायम रहने के बावजूद दोनों को कारावास की अवधि में राहत मिली है।

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