रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JET)-2026 को लेकर पलामू के सामाजिक संगठन जन जागृति एवं कल्याण केंद्र ने राज्यपाल को अपनी विभिन्न मांगों से अवगत कराया है. संगठन ने परीक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने, न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 साल करने और भाषा के आधार पर अलग पलामू राज्य गठन की मांग उठाई है. संगठन के सचिव राहुल कुमार उर्फ राहुल क्रांति ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय युवाओं के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है.
नागपुरी भाषा से परिचित नहीं हैं पलामू प्रमंडल के अधिकांश युवा
संगठन का कहना है कि पलामू प्रमंडल के पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों में बड़ी संख्या में लोग मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषा बोलते हैं. इसके बावजूद JET-2026 में नागपुरी भाषा को प्राथमिकता दिए जाने से स्थानीय अभ्यर्थियों को परेशानी हो सकती है. संगठन के अनुसार, पलामू प्रमंडल के अधिकांश युवा नागपुरी भाषा से परिचित नहीं हैं, जिससे शिक्षक पात्रता परीक्षा में उनकी सफलता प्रभावित हो सकती है.
‘स्थानीय अभ्यर्थियों के हितों के खिलाफ है नियम’
संगठन ने यह भी कहा कि 2013 और 2016 की शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में मगही, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएं शामिल थीं लेकिन इस बार इन भाषाओं को हटाया गया है. इसे स्थानीय अभ्यर्थियों के हितों के खिलाफ बताते हुए संगठन ने इन भाषाओं को फिर से परीक्षा में शामिल करने की मांग की है.
न्यूनतम आयु सीमा को लेकर संगठन का आक्रोश!
JET-2026 की न्यूनतम आयु सीमा को लेकर भी संगठन ने सवाल उठाए हैं. संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की गाइडलाइन और CTET के अनुरूप शिक्षक पात्रता परीक्षा में न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष निर्धारित है, जबकि झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में इसे 21 वर्ष रखा गया है. इससे कई योग्य और प्रशिक्षित अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो रहे हैं. संगठन ने आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की मांग की है.
क्षेत्रीय भाषाओं की लगातार उपेक्षा: संगठन
इसके साथ ही भाषा और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर अलग पलामू राज्य गठन का मुद्दा भी उठाया गया. संगठन का कहना है कि पलामू, गढ़वा, लातेहार समेत कई जिलों में मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं लेकिन राज्य स्तर पर इन्हें पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है. संगठन ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय भाषाओं की लगातार उपेक्षा से स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है.
स्थानीय युवाओं और क्षेत्रीय भाषाओं के हित में सरकार को जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए ताकि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न न हो: राहुल कुमार उर्फ राहुल क्रांति, सचिव, जन जागृति कल्याण केंद्र


