रांची: झारखंड में स्टार्टअप और नए उद्यमों को लेकर युवाओं की रुचि बढ़ती दिखाई दे रही है। पिछले चार महीनों में राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम में गतिविधियां बढ़ी हैं। जहां करीब चार महीने पहले हर महीने एक नए उद्यम का प्रस्ताव सामने आ रहा था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग तीन प्रस्ताव प्रतिमाह हो गई है।
कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ अब आदिवासी परिधान और वेलनेस उत्पादों से जुड़े कारोबार को लेकर भी नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
कृषि और खाद्य क्षेत्र में बढ़ी दिलचस्पी
नए उद्यम प्रस्तावों में कृषि आधारित कारोबार, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े आइडिया प्रमुख हैं। इसके अलावा आदिवासी परिधानों और वेलनेस प्रोडक्ट के क्षेत्र में भी उद्यमी नई कारोबारी संरचना विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
नीति आयोग से जुड़े उद्यमी और स्टार्टअप विशेषज्ञ संजय सहाय के अनुसार, यह रुझान झारखंड के युवाओं की ओर से किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों को दर्शाता है। उनके मुताबिक राज्य के पास स्थानीय संसाधनों और उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की संभावनाएं हैं।
सहजन के उत्पादों को विदेश से मिले ऑर्डर
अगस्त में सहजन से वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार करने वाले एक स्टार्टअप को विदेशी बाजारों से ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई। इसे स्थानीय कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन के जरिए बाजार का विस्तार करने की संभावना के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।
वैश्विक बाजार से जुड़ने की संभावना
संजय सहाय का कहना है कि झारखंड में ऐसे स्टार्टअप का व्यापक नेटवर्क विकसित करने की क्षमता है, जो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचा सके। इसके लिए उत्पाद विकास, तकनीकी सहायता, बाजार की समझ और निवेश जैसे पहलुओं पर लगातार काम करने की जरूरत होगी।
स्टार्टअप को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने वाले मुकेश झा के अनुसार, राज्य में वर्ष 2028 तक एक हजार से अधिक स्टार्टअप विकसित होने की क्षमता है।
निवेश जुटाना अब भी बड़ी चुनौती
स्टार्टअप की संख्या बढ़ने के बावजूद नए उद्यमियों के सामने पूंजी जुटाना एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। शुरुआती स्तर पर कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए निवेश, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच जैसी जरूरतें पूरी करना जरूरी है।
राज्य में नए प्रस्तावों की प्रगति की समीक्षा वर्ष के अंत में किए जाने की बात कही गई है। इससे आने वाले महीनों में स्टार्टअप गतिविधियों की वास्तविक स्थिति और नए उद्यमों की प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।
