Thursday, October 1, 2026

झारखंड में मानसून की मेहरबानी, 13 मौसम प्रणालियों ने संभाली बारिश की स्थिति; खेतों में लौटी हरियाली.

Share

रांची: मानसून की शुरुआत में कम बारिश ने झारखंड में सूखे की चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच सक्रिय रहे मौसम तंत्रों ने स्थिति को काफी हद तक बदल दिया। राज्य में पूरे मानसून सीजन के दौरान 1005.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षापात 1022.9 मिलीमीटर है। यानी कुल कमी महज 2 प्रतिशत रही।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कई निम्न दबाव वाले सिस्टम झारखंड तक पहुंचे और इनके प्रभाव से जुलाई, अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश हुई। इससे जून की बारिश में हुई बड़ी कमी की भरपाई करने में मदद मिली।

जून में बारिश ने बढ़ाई थी चिंता

मानसून के शुरुआती दौर में राज्य में बारिश की स्थिति कमजोर रही थी। जून में सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण खरीफ खेती और जलस्रोतों को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसके बाद मानसून गतिविधि में तेजी आई और लगातार बारिश से राज्य के कुल वर्षापात का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया।

इस साल झारखंड में मानसून का प्रभाव करीब 111 दिनों तक रहा। 14 अगस्त को लातेहार में एक दिन में 318 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन की राज्य में एक दिन की सर्वाधिक वर्षा बताई गई है।

जिलों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं

राज्य का औसत आंकड़ा भले ही सामान्य के करीब रहा, लेकिन अलग-अलग जिलों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा। पश्चिमी सिंहभूम में 1476 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 47 प्रतिशत अधिक रही। सरायकेला-खरसावां में भी सामान्य से अधिक बारिश हुई।

वहीं पाकुड़, चतरा, देवघर, गुमला, हजारीबाग, कोडरमा, पलामू और गढ़वा जैसे जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। पाकुड़ में सामान्य की तुलना में सबसे अधिक कमी रही।

खरीफ फसलों के लिए राहत

बारिश की स्थिति सुधरने का असर खरीफ खेती पर भी दिखाई दिया है। राज्य में इस साल करीब 28.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले लगभग 22.61 लाख हेक्टेयर में फसल का आच्छादन हुआ।

धान की खेती के लिए निर्धारित करीब 17.88 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले लगभग 17.06 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई। इससे किसानों के लिए मानसून के दूसरे हिस्से की बारिश राहत लेकर आई।

देशभर में बारिश कम, झारखंड सामान्य के करीब

2026 का मानसून देश के स्तर पर कमजोर रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम रही और बड़ी संख्या में जिलों में वर्षा की कमी दर्ज की गई। इसके मुकाबले झारखंड में कुल मौसमी बारिश सामान्य से सिर्फ 2 प्रतिशत कम रही।

हालांकि राज्य के औसत आंकड़े के पीछे जिलावार बड़ा अंतर छिपा है। इसलिए कम बारिश वाले जिलों में खेती और जल उपलब्धता की स्थिति पर अलग से नजर रखना जरूरी है।

मानसून की विदाई के संकेत

30 सितंबर तक मानसून की आधिकारिक अवधि पूरी हो चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। ताजा रिपोर्टों में अगले कुछ दिनों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और करीब 5 अक्टूबर के आसपास मानसून की वापसी की संभावना जताई गई है।

कुल मिलाकर, शुरुआती बारिश की कमी के बावजूद बाद के महीनों में सक्रिय मौसम प्रणालियों ने झारखंड के मौसमी वर्षापात को सामान्य के करीब ला दिया। इससे राज्य के बड़े हिस्से में खरीफ फसलों के लिए परिस्थितियां बेहतर बनीं, हालांकि कुछ जिलों में बारिश की कमी अभी भी चिंता का विषय है।

BHARATSUPRFASTNEWS

Read more

Local News