Ranchi News, 6 November 2026: चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव सहित अन्य की अपील याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। शुक्रवार को जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
लालू प्रसाद की ओर से अधिवक्ता देवर्षि मंडल ने पक्ष रखा। बचाव पक्ष की दलील थी कि जिन गवाहों के बयान अभियोजन पक्ष ने पेश किए हैं, उनसे लालू प्रसाद का कथित अपराध से सीधा संबंध स्थापित नहीं होता।
देवघर पशुपालन कार्यालय से जुड़ा है मामला
यह मामला देवघर जिला पशुपालन कार्यालय से कथित अवैध निकासी से संबंधित है। इस मामले में लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई थी। क्रिमिनल अपील संख्या 138/2018 की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दो गवाहों की गवाही और जिरह के दौरान सामने आए तथ्यों का हवाला दिया।
बचाव पक्ष का तर्क है कि इन गवाहों के बयान कथित अवैध निकासी में लालू प्रसाद की प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं करते।
पीडब्ल्यू-42 शिवशंकर तिवारी की गवाही का उल्लेख
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पीडब्ल्यू-42 शिवशंकर तिवारी की गवाही का उल्लेख किया। शिवशंकर तिवारी वर्ष 1994 में देवघर में कार्यपालक दंडाधिकारी के पद पर कार्यरत थे। तत्कालीन उपायुक्त सुखदेव सिंह के निर्देश पर उन्होंने पशुपालन विभाग से संबंधित शिकायतों की जांच की थी।
गवाह के अनुसार, देवघर जिला पशुपालन कार्यालय में छह हजार रुपये के आवंटन के मुकाबले 50 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी की शिकायत मिली थी। बाद में जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में देवघर कोषागार से पशुपालन विभाग के मद में करीब 98 लाख रुपये की अवैध निकासी का उल्लेख किया था।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि शिवशंकर तिवारी की गवाही में ऐसा कोई प्रत्यक्ष तथ्य सामने नहीं आया, जिससे लालू प्रसाद को कथित अवैध निकासी से सीधे जोड़ा जा सके।
पीडब्ल्यू-37 प्रेम चंद्र ठाकुर की गवाही पर भी सवाल
बचाव पक्ष ने पीडब्ल्यू-37 प्रेम चंद्र ठाकुर के बयान को भी अदालत के सामने रखा। प्रेम चंद्र ठाकुर वर्ष 1987 से अप्रैल 2006 तक गोड्डा जिला पशुपालन कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत थे।
उन्होंने अपनी गवाही में बताया था कि गोड्डा और देवघर के जिला पशुपालन कार्यालय क्षेत्रीय निदेशक, पशुपालन विभाग, दुमका के अधीन आते थे। गवाह ने यह भी कहा था कि कर्मचारियों के बीच बातचीत के दौरान उन्हें देवघर कार्यालय में कथित अवैध निकासी की जानकारी मिली थी।
उन्होंने तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक शेषमुनि राम के कई बड़े नेताओं से संबंध होने की बात भी कही थी। इनमें डॉ. आरके राणा, राजो सिंह और तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के नाम शामिल थे।
जिरह में व्यक्तिगत मुलाकात नहीं होने की बात स्वीकार की
बचाव पक्ष ने प्रेम चंद्र ठाकुर की जिरह के दौरान दिए गए जवाबों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी गवाही सुनी-सुनाई जानकारी पर आधारित थी।
जिरह के दौरान प्रेम चंद्र ठाकुर ने स्वीकार किया था कि उनकी लालू प्रसाद या डॉ. आरके राणा से कभी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी बताया था कि शेषमुनि राम ने उन्हें इन नेताओं से अपने करीबी संबंधों के बारे में व्यक्तिगत रूप से कोई जानकारी नहीं दी थी।
गवाह के अनुसार, नेताओं से संबंधों की जानकारी उन्हें अन्य लोगों से मिली थी। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर उनकी गवाही की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और कहा कि केवल ऐसी जानकारी के आधार पर लालू प्रसाद की कथित भूमिका स्थापित नहीं की जा सकती।
18 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई अभी जारी है। शुक्रवार को बचाव पक्ष की ओर से रखी गई दलीलों के बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की।
आगामी सुनवाई में मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर बहस आगे बढ़ने की संभावना है। फिलहाल अदालत ने अपील पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
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