आषाढ़ शुक्ल एकादशी से चातुर्मास शुरू हो रहा है जिसमें भगवान विष्णु योग निद्रा में जाएंगे और शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। इस दौरान गुरु पूर्णिमा सावन मास और मधु श्रावणी जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाएंगे। सावन में शिव की आराधना और मिथिलांचल में नवविवाहिताओं द्वारा सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। जुलाई में कई व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे जो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं।
पटना। आषाढ़ शुक्ल एकादशी (छह जुलाई) से चातुर्मास आरंभ हो जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। चार मास के दौरान मांगलिक कार्य शादी-विवाह, मुंडन आदि कार्य वर्जित माना जाता है। चार माह के दौरान साधना व उपासना का विशेष महत्व है।
पं डित राघव नाथ झा ने बताया कि 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनेगा। श्रद्धालु अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता अर्पित कर पूजन करेंगे। 11 जुलाई से भगवान शिव का प्रिय मास सावन आरंभ हो जाएगा।
सावन मास में श्रद्धालु शिव को जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित करेंगे। नौ अगस्त की पूर्णिमा रक्षा बंधन के साथ सावन मास का समापन होगा। सावन माह में चार सोमवार का व्रत होगा।
15 जुलाई से मधु श्रावणी व्रत:
15 जुलाई से मिथिलांचल का लोक पर्व मधु श्रावणी आरंभ होगा। 27 जुलाई तक चलने वाले पर्व के दौरान मिथिलांचल की नवविवाहिता सुख-समृद्धि, सौभाग्य की कामना को लेकर विधि-विधान के साथ पूजन करेंगी।
व्रत के दौरान नवविवाहिता नाग-नागिन, सप्तकन्या, सप्तऋषि की कथा के साथ देवी पार्वती की आराधना करेंगी। पर्व मिथिला की नारी संस्कृति का सशक्त प्रतीक है।
माह के प्रमुख व्रत व पर्व:
- 14 जुलाई: प्रथम सोमवार, गणेश चतुर्थी
- 15 जुलाई: मंगला गौरी व्रत, मौना पंचमी, मधु श्रावणी आरंभ
- 17 जुलाई: शीतला सप्तमी
- 21 जुलाई: द्वितीय सोमवार, कामदा एकादशी
- 23 जुलाई: श्रावण शिवरात्रि
- 27 जुलाई: हरियाली तीज, मधु श्रावणी व्रत समापन
- 28 जुलाई: तृतीय सोमवार, विनायक चतुर्थी
- 29 जुलाई: नाग पंचमी
- 31 जुलाई: तुलसीदास जयंती
- 4 अगस्त: चतुर्थ सोमवार
- 5 अगस्त: पुत्रदा एकादशी
- 9 अगस्त: श्रावणी पूर्णिमा, रक्षा बंधन


