रांची | 30 अक्टूबर 2026
झारखंड के गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई नाबालिग बच्ची के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया में लापरवाही और समय पर रिपोर्ट नहीं भेजे जाने को गंभीरता से लिया है। राज्य सरकार ने अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर स्वीकार किया कि अनुसंधान की आवधिक रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), गुमला को देरी से भेजी गई।
सरकार के अनुसार, अनुसंधानकर्ता ने यह रिपोर्ट 23 अक्टूबर 2026 को DLSA को भेजी। इस देरी के लिए सरकार की ओर से अदालत से बिना शर्त माफी भी मांगी गई।
रिपोर्ट में देरी पर वन मैन कमेटी की भूमिका पर सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि रिपोर्ट भेजने में हुई देरी पर वन मैन कमेटी ने विचार क्यों नहीं किया? अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच गुमला में पदस्थापित तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और अनुसंधानकर्ता को किस आधार पर क्लीन चिट दी गई।
अदालत ने कहा कि नियमानुसार FIR दर्ज होने के चार महीने के भीतर पहली आवधिक रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए थी। इसके बाद बच्ची के लापता रहने की स्थिति में प्रत्येक तीन महीने पर रिपोर्ट DLSA को भेजना आवश्यक था।
इस बिंदु पर हाईकोर्ट ने गृह विभाग के माध्यम से राज्य सरकार को विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और पुलिस कस्टडी पर भी सवाल
सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा को 6 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उससे पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी की मांग करते हुए आवेदन भी दिया गया है।
इस पर अदालत ने सवाल किया कि गिरफ्तारी के चार-पांच दिन बाद पुलिस कस्टडी की मांग करना कितना उचित है। हाईकोर्ट ने गुमला के पुलिस अधीक्षक को जवाब दाखिल कर बताने को कहा है कि बच्ची के लापता होने के मामले में जांच सही तरीके से क्यों नहीं की गई और अनुसंधान में ढिलाई क्यों बरती गई।
आरोपी के सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट में संदिग्ध होने की जानकारी
सुनवाई में सरकार की ओर से बताया गया कि मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा का गुजरात के गांधीनगर में सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट कराया गया था, जिसमें वह संदिग्ध पाई गई।
इससे पहले अदालत को जानकारी दी गई थी कि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से आरोपी का नार्को टेस्ट नहीं हो सका था। इसके स्थान पर सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट सहित दो पूरक परीक्षण कराए गए थे।
वर्ष 2018 से लापता है 15 वर्षीय बच्ची
यह मामला सितंबर 2018 से लापता गुमला की 15 वर्षीय बच्ची से जुड़ा है। बच्ची की बरामदगी की मांग को लेकर उसकी मां चंद्रमुनि उराइन ने झारखंड हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की है।
पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने अदालत को बताया था कि सरकार के पूर्व के शपथ पत्र में वर्ष 2018 से 2022 तक के तत्कालीन एसपी और अनुसंधानकर्ता को क्लीन चिट दी गई थी, जबकि उस समय FIR दर्ज करने में भी देरी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि बच्ची के लापता होने से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सरकार की ओर से अदालत के सामने नहीं रखा गया।
17 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने की। अदालत ने गृह विभाग और गुमला एसपी से जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
करीब आठ साल से लापता बच्ची की बरामदगी और जांच में कथित लापरवाही को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब पुलिस और सरकार के जवाब पर सबकी निगाहें रहेंगी।
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