Friday, October 23, 2026

खुले में मांस बिक्री पर हाईकोर्ट में सुनवाई: झारखंड में मीट दुकानों के लिए नए नियम लागू

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नगर निकाय की NOC, ट्रेड लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी; भारत सुपरफास्ट न्यूज़ की अपील—कुछ दिनों की कार्रवाई नहीं, नियमित निगरानी व्यवस्था बनाए प्रशासन

रांची, झारखंड | भारत सुपरफास्ट न्यूज़

झारखंड में खुले में मांस की बिक्री और मीट दुकानों के संचालन को लेकर अब नियम और स्पष्ट हो गए हैं। झारखंड हाईकोर्ट में खुले में कटे हुए बकरे और मुर्गे की बिक्री के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मीट दुकानों और स्लॉटर हाउस के संचालन को नियंत्रित करने के लिए नया नियम एवं रेगुलेशन लागू किया गया है। सरकार द्वारा नियम अधिसूचित किए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया।

नए प्रावधानों के तहत शहरी क्षेत्रों में मीट व्यवसाय को मनमाने तरीके से संचालित नहीं किया जा सकता। संबंधित नगर निगम, नगर परिषद अथवा नगर पंचायत से आवश्यक NOC लेना होगा। इसके साथ ही आवश्यक Trade Licence तथा FSSAI Licence/Registration और लागू खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।

NOC जारी करने से पहले संबंधित नगर निकाय द्वारा दुकान अथवा स्लॉटर हाउस का निरीक्षण किए जाने का प्रावधान है। दुकान की स्थिति, स्वच्छता, मांस रखने एवं प्रदर्शित करने की व्यवस्था, अपशिष्ट के निस्तारण तथा अन्य निर्धारित मानकों की जांच के बाद ही अनुमति की प्रक्रिया पूरी की जानी है।

नियमों के अनुसार खुले में मांस को प्रदर्शित करने या बेचने पर रोक है। मांस को ढके हुए अथवा उचित ग्लास काउंटर जैसी सुरक्षित व्यवस्था में रखा जाना चाहिए, ताकि धूल, मक्खियों, गंदगी और अन्य बाहरी प्रदूषण से उसे बचाया जा सके।

भारत सुपरफास्ट न्यूज़ की जिला प्रशासन एवं नगर निकायों से अपील

भारत सुपरफास्ट न्यूज़ राज्य के सभी उपायुक्तों, जिला प्रशासन, नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों से आग्रह करता है कि अपने-अपने क्षेत्र में संचालित मीट, मांस-मछली एवं संबंधित दुकानों की नियमानुसार जांच कराई जाए।

जांच में विशेष रूप से यह सत्यापित किया जाए कि संबंधित प्रतिष्ठान के पास आवश्यक NOC, Trade Licence, FSSAI Licence/Registration तथा अन्य आवश्यक वैधानिक अनुमति उपलब्ध है या नहीं और दुकान निर्धारित स्वच्छता एवं सुरक्षा मानकों का पालन कर रही है या नहीं।

सिर्फ एक-दो दिन का अभियान चलाकर मामले को छोड़ देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। आम तौर पर देखा जाता है कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानें बंद हो जाती हैं या खुले में बिक्री रोक देती हैं, लेकिन कुछ समय बाद पुरानी स्थिति फिर दिखाई देने लगती है। ऐसी स्थिति में बार-बार शिकायत, कार्रवाई और नए विवाद की प्रक्रिया दोहराई जाती है।

इसलिए आवश्यकता है कि नगर निकाय दुकानवार सत्यापन और नियमित निरीक्षण की स्थायी व्यवस्था विकसित करें। नियमों का पालन करने वाले वैध व्यवसायियों को अनावश्यक परेशानी न हो, लेकिन बिना आवश्यक अनुमति अथवा निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित प्रतिष्ठानों पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

यह केवल लाइसेंस का नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी व्यवस्था का भी विषय

खुले में मांस काटने, लटकाने या प्रदर्शित करने से स्वच्छता, दुर्गंध, मक्खी एवं अपशिष्ट प्रबंधन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सार्वजनिक स्थानों से गुजरने वाले बच्चों तथा उन नागरिकों की संवेदनशीलता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए जो ऐसे दृश्य नहीं देखना चाहते।

इसका उद्देश्य किसी की खान-पान की व्यक्तिगत पसंद में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता, कानून और निर्धारित व्यवस्था का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना होना चाहिए।

हाईकोर्ट में लंबे समय से चल रहा था मामला

यह मामला W.P. (PIL) No. 5169 of 2023, Shyamanand Pandey v. State of Jharkhand & Others से संबंधित है। पूर्व की सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को खाद्य सुरक्षा नियमों तथा Prevention of Cruelty to Animals (Slaughter House) Rules, 2001 के अनुपालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

अब राज्य सरकार द्वारा नया नियामक ढांचा लागू किए जाने और इसकी जानकारी हाईकोर्ट को दिए जाने के बाद जनहित याचिका निष्पादित कर दी गई है।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल—जमीन पर नियमों का पालन कितना?

नियम बनना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब जिला प्रशासन और नगर निकाय नियमित रूप से उसका पालन सुनिश्चित करें।

भारत सुपरफास्ट न्यूज़ की मांग है कि झारखंड के प्रत्येक शहरी निकाय क्षेत्र में मीट एवं संबंधित दुकानों का चरणबद्ध सर्वे और सत्यापन किया जाए, वैध दुकानों की पहचान की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

नियम एक दिन के अभियान के लिए नहीं—स्थायी अनुपालन के लिए हैं।

— भारत सुपरफास्ट न्यूज़

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