आमतौर पर स्वस्थ रहने के लिए ज्यादा पानी पीने, फल-सब्जियां खाने और नमक कम लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित लोगों के लिए ये नियम हमेशा एक जैसे नहीं हो सकते। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में पोटैशियम, सोडियम, फॉस्फोरस और तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनाई गई कुछ सामान्य हेल्थ टिप्स मरीजों की परेशानी बढ़ा सकती हैं।
हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. शशि किरण ए के अनुसार, किडनी की बीमारी से जूझ रहे हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए दूसरों के लिए फायदेमंद मानी जाने वाली डाइट या हेल्थ रूटीन को किडनी के मरीजों के लिए भी सही मान लेना उचित नहीं है।
किडनी के मरीजों के लिए अलग खानपान क्यों जरूरी है?
किडनी शरीर में एक प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती है। यह खून से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के साथ-साथ पानी और कई महत्वपूर्ण खनिजों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में कुछ पदार्थ जमा होने लगते हैं। विशेष रूप से सोडियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस का स्तर बढ़ने पर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। शरीर में अतिरिक्त तरल जमा होने से सूजन और अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं।
इसी वजह से किडनी की बीमारी में खानपान का निर्धारण मरीज की बीमारी की अवस्था, ब्लड टेस्ट, दवाओं और डायलिसिस जैसी जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
1. कम सोडियम वाला नमक भी हो सकता है नुकसानदायक
कम सोडियम वाले नमक को अक्सर सामान्य नमक का बेहतर विकल्प माना जाता है। हालांकि, ऐसे कई उत्पादों में सोडियम क्लोराइड की जगह पोटैशियम क्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है।
किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर के लिए अतिरिक्त पोटैशियम को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है। इससे खून में पोटैशियम का स्तर बढ़ने की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसे हाइपरकैलिमिया (Hyperkalemia) कहते हैं।
पोटैशियम का स्तर बहुत अधिक होने पर दिल की धड़कन की लय प्रभावित हो सकती है और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
क्या सावधानी बरतें? किडनी की बीमारी होने पर लो-सोडियम, लाइट या पोटैशियम युक्त नमक का इस्तेमाल शुरू करने से पहले डॉक्टर या किडनी डायटीशियन से सलाह लें। सेंधा नमक समेत किसी भी विकल्प को अपने आप सुरक्षित न मानें।
2. शुगर-फ्री और जीरो-कैलोरी ड्रिंक्स को लेकर सावधानी
शुगर-फ्री या जीरो-कैलोरी लिखे होने का मतलब यह नहीं है कि कोई पेय हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
कुछ पैक्ड और फिजी ड्रिंक्स में सोडियम वाले पदार्थ, फॉस्फोरिक एसिड या फॉस्फेट एडिटिव्स हो सकते हैं। इनकी मात्रा उत्पाद के अनुसार अलग-अलग होती है। किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए ऐसे पदार्थों का सेवन उनकी मेडिकल स्थिति के हिसाब से तय करना जरूरी है।
क्या करें? पैक्ड पेय खरीदते समय सामग्री की सूची और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ें। यदि आपकी किडनी की बीमारी के कारण फॉस्फोरस या सोडियम सीमित रखने की सलाह दी गई है, तो उत्पाद चुनने से पहले विशेषज्ञ की राय लें।
3. प्रोसेस्ड फूड में छिपा हो सकता है सोडियम और फॉस्फेट
इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट वाले स्नैक्स, बिस्कुट और कई तरह के तैयार खाद्य पदार्थों में सोडियम और फॉस्फेट एडिटिव्स की मात्रा अधिक हो सकती है।
फॉस्फेट एडिटिव्स से मिलने वाला फॉस्फोरस शरीर में आसानी से अवशोषित हो सकता है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर इसका संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा सोडियम का सेवन कुछ मरीजों में ब्लड प्रेशर और शरीर में तरल जमा होने की समस्या को बढ़ा सकता है।
बेहतर विकल्प: जहां संभव हो, ताजा और घर पर तैयार भोजन को प्राथमिकता दें। पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का लेबल पढ़ें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सोडियम तथा फॉस्फेट की मात्रा पर ध्यान दें।
4. जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी हो सकता है परेशानी का कारण
स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, लेकिन हर व्यक्ति की पानी की जरूरत एक जैसी नहीं होती।
किडनी की गंभीर बीमारी या कुछ हृदय रोगों में शरीर अतिरिक्त तरल को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता। ऐसे में जरूरत से ज्यादा पानी या अन्य तरल पदार्थ लेने से शरीर में पानी जमा हो सकता है। इसके कारण पैरों या शरीर के दूसरे हिस्सों में सूजन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी किडनी मरीजों को पानी कम पीना चाहिए। कुछ लोगों को पर्याप्त तरल लेना जरूरी होता है, जबकि अन्य मरीजों को इसकी मात्रा सीमित रखने की सलाह दी जा सकती है।
ध्यान रखें: पानी की मात्रा अपनी बीमारी की स्थिति, पेशाब की मात्रा और डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के न तो पानी बहुत ज्यादा पिएं और न ही जरूरत से ज्यादा सीमित करें।
5. किडनी डाइट में जरूरत से ज्यादा पाबंदी भी नुकसान पहुंचा सकती है
किडनी की बीमारी में खानपान को लेकर केवल लापरवाही ही नहीं, बल्कि अत्यधिक पाबंदियां भी समस्या पैदा कर सकती हैं।
कई मरीज पोटैशियम या फॉस्फोरस बढ़ने के डर से फल, सब्जियां, दालें, मेवे और डेयरी उत्पाद पूरी तरह बंद कर देते हैं। इससे उनके भोजन में प्रोटीन, कैलोरी और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
लंबे समय तक अपर्याप्त पोषण लेने से कमजोरी और कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, भोजन से जुड़ी अत्यधिक पाबंदियां मरीजों के लिए परिवार के साथ सामान्य रूप से खाना खाना भी मुश्किल बना सकती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्वों पर प्रतिबंध मरीज की रिपोर्ट और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर तय किया जाए। हर किडनी मरीज को एक ही तरह का डाइट चार्ट देना सही तरीका नहीं है।
किडनी के मरीज अपनी डाइट को सुरक्षित कैसे बनाएं?
किडनी की बीमारी में खानपान की योजना बनाते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- किडनी विशेषज्ञ से सलाह लें: नेफ्रोलॉजिस्ट और किडनी डायटीशियन आपकी मेडिकल स्थिति के अनुसार भोजन की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं।
- बीमारी की अवस्था समझें: शुरुआती क्रोनिक किडनी डिजीज, डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट के बाद पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं।
- ब्लड टेस्ट को नजरअंदाज न करें: पोटैशियम, फॉस्फोरस और eGFR जैसी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर खानपान में बदलाव की सलाह दे सकते हैं।
- फूड लेबल पढ़ें: पैक्ड खाद्य पदार्थों में सोडियम और फॉस्फेट एडिटिव्स की जानकारी देखें। केवल किसी उत्पाद पर लिखे ‘हेल्दी’ या ‘शुगर-फ्री’ जैसे शब्दों के आधार पर फैसला न करें।
- स्वाद के लिए विकल्प अपनाएं: डॉक्टर की सलाह के अनुसार लहसुन, अदरक, नींबू, काली मिर्च और अन्य उपयुक्त मसालों से भोजन का स्वाद बढ़ाया जा सकता है।
- बिना सलाह सप्लीमेंट न लें: विटामिन, मिनरल सप्लीमेंट और नमक के विकल्प भी किडनी की स्थिति के अनुसार ही इस्तेमाल करें।
- दवाओं को लेकर सावधानी बरतें: आइबुप्रोफेन जैसी NSAID दर्द निवारक दवाएं कुछ लोगों में किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इन्हें नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
- खानपान की डायरी बनाएं: रोजाना खाए गए भोजन और पेय पदार्थों का रिकॉर्ड रखने से डायटीशियन को आपकी जरूरतों के अनुसार डाइट तैयार करने में मदद मिल सकती है।
खर्च, समय और सही जानकारी की कमी भी बड़ी चुनौती
किडनी की बीमारी के साथ रहने वाले लोगों के लिए सही खानपान अपनाना हमेशा आसान नहीं होता। भोजन की लागत, खाना तैयार करने में लगने वाला समय और भरोसेमंद जानकारी की कमी के कारण कई मरीज निर्धारित डाइट का पालन नहीं कर पाते।
डायलिसिस कराने वाले मरीजों के लिए ये चुनौतियां और भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं, क्योंकि उनकी पोषण संबंधी जरूरतें विशेष होती हैं। इसलिए डाइट प्लान ऐसा होना चाहिए जिसे मरीज अपनी आर्थिक स्थिति, दिनचर्या और उपलब्ध खाद्य पदार्थों के अनुसार व्यावहारिक रूप से अपना सके।
सोशल मीडिया की हेल्थ टिप्स पर आंख बंद करके भरोसा न करें
आजकल सोशल मीडिया पर पानी पीने, डिटॉक्स ड्रिंक्स, विशेष डाइट और नमक के विकल्पों को लेकर कई तरह की सलाह मिलती हैं। लेकिन सामान्य लोगों के लिए बनाई गई सलाह जरूरी नहीं कि किडनी की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के लिए भी उपयुक्त हो।
इसी तरह, किसी दूसरे मरीज की डाइट को बिना अपनी मेडिकल स्थिति समझे अपनाना भी सही नहीं है। किडनी की बीमारी की अवस्था, ब्लड रिपोर्ट, दवाओं और अन्य बीमारियों के आधार पर खानपान की जरूरत बदल सकती है।
इसलिए किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद करने या अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
निष्कर्ष: किडनी की सेहत के लिए व्यक्तिगत डाइट प्लान जरूरी
किडनी के मरीजों के लिए स्वस्थ खानपान का मतलब केवल कम नमक खाना या ज्यादा पानी पीना नहीं है। सही डाइट वह है जो मरीज की किडनी की कार्यक्षमता, ब्लड टेस्ट और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप हो।
लो-सोडियम नमक, पैक्ड ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड और जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ कुछ मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। वहीं, डर के कारण फल, सब्जियां और प्रोटीन के स्रोत पूरी तरह छोड़ देना भी पोषण की कमी पैदा कर सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि किडनी की बीमारी में खानपान से जुड़े फैसले डॉक्टर या किडनी डायटीशियन की सलाह के अनुसार लें। संतुलित और व्यक्तिगत डाइट प्लान अपनाकर स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने और बेहतर पोषण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूचना: यह लेख सामान्य जागरूकता के लिए है। यह डॉक्टर की जांच, निदान या व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।
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