Saturday, May 2, 2026

कहीं नल से खेतों की सिंचाई हो रही है, तो कहीं घरों में पानी नहीं आ रहा,तीन करोड़ से अधिक घरों तक शुद्ध पानी पहुंचाने के दावे के बावजूद, कई इलाकों में लोग पानी को तरस रहे हैं।

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बिहार में हर घर शुद्ध जल नल योजना जमीनी स्तर पर विफल दिख रही है। तीन करोड़ से अधिक घरों तक शुद्ध पानी पहुंचाने के दावे के बावजूद, कई इलाकों में लोग पानी को तरस रहे हैं। कहीं नल से खेतों की सिंचाई हो रही है, तो कहीं घरों में पानी नहीं आ रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बदतर है, जहां पाइप बिछने के बावजूद नियमित आपूर्ति नहीं है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है

पटना। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर शुद्ध जल नल योजना जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है। योजना के तहत तीन से अधिक घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि कई इलाकों में लोगों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कहीं नल से खेतों की सिंचाई हो रही है, तो कहीं घरों में एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हो रहा।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है। कई गांवों में नल-जल योजना के पाइप तो बिछा दिए गए, लेकिन नियमित जलापूर्ति अब तक शुरू नहीं हो सकी है। कहीं मोटर खराब पड़ी है, तो कहीं बोरिंग सूख चुकी है। इसके बावजूद विभागीय कागजों में योजना पूरी दिखाई जा रही है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन घरों तक पानी पहुंचना चाहिए, वहां नल सूखे पड़े हैं, जबकि कुछ प्रभावशाली लोग नल कनेक्शन से खुलेआम खेतों की सिंचाई कर रहे हैं।

इससे एक ओर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों का हक मारा जा रहा है। महिलाओं को रोजाना दूर-दराज के हैंडपंप या तालाब से पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि सुबह से शाम तक पानी की व्यवस्था में ही समय निकल जाता है। बच्चों की पढ़ाई और घर के अन्य काम प्रभावित हो रहे हैं।

बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह संकट और भी गंभीर बन गया है। कई जगहों पर दूषित पानी पीने से लोग बीमार भी पड़ रहे हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही बरती गई है। न तो समय पर रखरखाव किया जा रहा है और न ही शिकायतों का समाधान हो रहा है।

बार-बार आवेदन देने के बावजूद अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को टाल देते हैं। कुछ जगहों पर तो वर्षों से पानी की आपूर्ति बंद है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी कारणों और भूजल स्तर गिरने से परेशानी आ रही है। जल्द ही मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए समस्या का समाधान किया जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों का भरोसा अब इन आश्वासनों से उठता जा रहा है।

पेयजल जैसे बुनियादी अधिकार को लेकर यह स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह संकट और विकराल रूप ले सकता है।

जरूरत है कि नल-जल योजना की वास्तविक समीक्षा हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नल का पानी खेतों में नहीं, बल्कि लोगों के घरों तक पहुंचे।

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