Saturday, April 18, 2026

उत्तराखंड में आज से 113 किलोमीटर लंबा ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ शुरू हो गया.

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उत्तराखंड में आज से 113 किलोमीटर लंबा ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ शुरू हो गया. बदरीनाथ धाम से जुड़े ‘सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0’ में देशभर से आए करीब 300 धावक दौड़ रहे हैं. ऊंचाई, चढ़ाई और बदलते मौसम के बीच ये रेस तीन दिन में पूरी की जाएगी. इस मैराथन को सबसे पहले पूरा करने वाले को एक लाख का इनाम दिया जाएगा.

इस आयोजन के जरिए सरकार और सेना पहाड़ के गांवों में पर्यटन बढ़ाने, स्थानीय लोगों को काम से जोड़ने और इस पुराने ट्रेल को फिर से एक्टिव करने की कोशिश कर रही है. मैराथन के बहाने जिन गांवों से धावक गुजरेंगे, वहां सीधा असर दिखने की उम्मीद है. चैलेंज को तीन हिस्सों में बांटा गया है. पहले दिन हेलंग से 36 किलोमीटर की दौड़ होगी. दूसरे दिन कलगोट से 39 किलोमीटर और तीसरे दिन उखीमठ तक करीब 38 किलोमीटर की दौड़ होगी. पूरा रूट पुराने बदरी-केदार पैदल मार्ग पर है. यह पहले तीर्थ यात्रा का अहम रास्ता रहा है. रास्ते में पंच-केदार के तीन धाम कल्पेश्वर, रुद्रनाथ और तुंगनाथ आते हैं.

शुक्रवार को हेलंग से धावकों को रवाना किया गया. शुरुआत के साथ ही सभी प्रतिभागी पहाड़ी ट्रेक पर निकले. पहले दिन का पड़ाव कलगोट है. यहां धावक करीब 36 किलोमीटर की दूरी तय करके पहुंचें. यहां उनके ठहरने के लिए आर्मी ने होमस्टे की व्यवस्था की गई है.

10 हजार फीस, 18 से 60 साल तक के धावक शामिल: इस मैराथन में हिस्सा लेने के लिए 10 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन फीस रखी गई थी. 18 से 60 साल तक के लोग इसमें भाग ले रहे हैं. इनमें प्रोफेशनल रनर भी हैं. एडवेंचर के शौकीन भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं. प्रतियोगिता में इनाम भी रखा गया है. पहले स्थान पर आने वाले को 1 लाख रुपए और दूसरे को 50 हजार रुपए मिलेंगे. इसके अलावा बाकी प्रतिभागियों को भी अलग-अलग कैटेगरी में सम्मान दिया जाएगा.

देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे प्रतिभागी: इस प्रतियोगिता में जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक के प्रतिभागी इसमें शामिल हैं. महिला धावकों की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है. पिछली बार गंगोत्री-यमुनोत्री, इस बार बदरी-केदार में ये आयोजन किया जा रहा है. पिछले साल यह आयोजन हर्षिल, गंगोत्री और यमुनोत्री क्षेत्र में हुआ था. इस बार इसे बदरी-केदार ट्रेल पर लाया गया है. लोकेशन बदलने से रूट भी ज्यादा कठिन और लंबा हो गया है.

गांवों में होमस्टे और काम के मौके बढ़ेंगे: इस मैराथन का सीधा असर रास्ते में पड़ने वाले गांवों पर पड़ेगा. धावकों के ठहरने, खाने और गाइड जैसी जरूरतों से स्थानीय लोगों को काम मिल रहा है. होमस्टे मॉडल को बढ़ावा देने की भी कोशिश की जा रही है. जिससे भविष्य में यहां ज्यादा पर्यटक आएं.

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