नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा (डॉलर) को भारत लाने और भारतीय रुपये को मजबूत बनाने के लिए एक नया फैसला किया है. रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए एक खास ‘यूएस डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा’ शुरू की है. यह सुविधा प्रवासी भारतीयों (NRIs) द्वारा बैंकों में जमा किए जाने वाले नए ‘फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट’ यानी FCNR(B) डिपॉजिट पर मिलेगी. इसका सीधा मकसद देश में डॉलर के भंडार को बढ़ाना है.
यह योजना कैसे काम करेगी?
‘स्वैप’ का मतलब होता है आपस में अदला-बदली करना. इस योजना के तहत, जब कोई एनआरआई भारतीय बैंक में विदेशी मुद्रा जमा करेगा, तो बैंक उस पैसे को डॉलर में बदलकर रिजर्व बैंक (RBI) को दे देगा.
इसके साथ ही बैंक और आरबीआई के बीच एक समझौता होगा. इस समझौते के तहत, योजना का समय पूरा होने पर आरबीआई उसी पुरानी विनिमय दर पर बैंकों को डॉलर वापस लौटा देगा. इससे बैंकों को बाजार में डॉलर के उतार-चढ़ाव से कोई नुकसान नहीं होगा.
इस योजना के मुख्य नियम इस प्रकार हैं
- लेनदेन की सीमा: बैंक इस सुविधा के लिए आरबीआई के साथ कम से कम 10 लाख अमेरिकी डॉलर (1 मिलियन) या इसके गुणकों में ही लेनदेन कर सकते हैं.
- समय सीमा: यह सुविधा केवल उन्हीं जमा पैसों पर मिलेगी जो कम से कम 3 साल और ज्यादा से ज्यादा 5 साल के लिए फिक्स किए जाएंगे.
- केवल डॉलर में सौदा: एनआरआई चाहे तो पाउंड या यूरो जैसी किसी भी बड़ी विदेशी मुद्रा में पैसा जमा कर सकते हैं, लेकिन बैंक और आरबीआई के बीच यह सौदा केवल अमेरिकी डॉलर में ही होगा.
- 1 साल का लॉक-इन: ग्राहकों के लिए इस पैसे पर 1 साल का कड़ा नियम रहेगा. यानी 1 साल से पहले इस खाते से पैसा नहीं निकाला जा सकेगा.
- सौदा रद्द नहीं होगा: बैंक एक बार आरबीआई के साथ यह स्वैप सौदा कर लेंगे, तो इसे बीच में रद्द नहीं किया जा सकेगा.
सरकारी कंपनियों को भी फायदा
रिजर्व बैंक ने केवल एनआरआई जमा पर ही नहीं, बल्कि दो और जगहों पर भी यह डॉलर स्वैप की सुविधा दी है:
सरकारी कंपनियां (PSUs): सरकारी कंपनियां विदेशों से जो कर्ज (ECB) लेती हैं, अगर उसकी अवधि 3 साल या उससे ज्यादा है, तो उन्हें भी यह सुविधा मिलेगी.
भारतीय बैंक: बैंक विदेशों से जो विदेशी मुद्रा कर्ज (OFCBs) लेते हैं, जिसकी अवधि कम से कम 3 साल हो, वे भी इसका फायदा उठा सकते हैं.
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आरबीआई खुद डॉलर के उतार-चढ़ाव का जोखिम उठा रहा है. इससे बैंकों का खर्च बचेगा और वे प्रवासी भारतीयों (NRIs) को उनकी जमा राशि पर ज्यादा ब्याज दे पाएंगे.


