रांची | 13 अक्टूबर 2026: झारखंड में असाध्य रोग से पीड़ित शिक्षकों और उनके परिवार के सदस्यों के इलाज के आधार पर अंतरजिला तबादले की मांग कर रहे 90 शिक्षकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने पश्चिमी सिंहभूम जिला शिक्षा स्थापना समिति, चाईबासा के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें शिक्षकों के तबादले से जुड़े आवेदनों को खारिज कर दिया गया था।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को संबंधित शिक्षकों के आवेदन तथा आवश्यक दस्तावेज प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पास भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को निर्धारित स्थानांतरण नीति के तहत मामलों की जांच कर स्वीकृति देने और तबादला आदेश जारी करने को कहा है। पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के 10 सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी।
90 शिक्षकों को राहत, 24 जुलाई 2025 का फैसला रद्द
मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के उन शिक्षकों से जुड़ा है, जिन्होंने असाध्य रोग, दिव्यांगता और परिवार के सदस्यों के इलाज जैसी विशेष परिस्थितियों के आधार पर दूसरे जिले में स्थानांतरण की मांग की थी।
दो अलग-अलग याचिकाओं में कुल 90 शिक्षक शामिल थे। जिला शिक्षा स्थापना समिति ने 24 जुलाई 2025 को उनके दावों को खारिज कर दिया था। शिक्षकों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
अदालत ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवादित आदेश को याचिकाकर्ताओं के संबंध में निरस्त कर दिया। हालांकि, तबादले से जुड़ी आगे की प्रक्रिया निर्धारित नीति के अनुसार सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के साथ पूरी की जानी है।
मेडिकल बोर्ड ने असाध्य रोग की श्रेणी में रखे थे मामले
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति में असाध्य रोग, दिव्यांगता और अन्य विशेष परिस्थितियों में अंतरजिला तबादले का प्रावधान है।
मामलों की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था। बोर्ड ने 23 जून, 4 जुलाई और 10 जुलाई 2025 को संबंधित शिक्षकों या उनके पति-पत्नी और बच्चों की चिकित्सकीय जांच की थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट में संबंधित मामलों को असाध्य रोग की श्रेणी में पाया गया था।
इसके बावजूद जिला शिक्षा स्थापना समिति ने शिक्षकों के आवेदनों को मंजूरी नहीं दी। समिति ने जिले में शिक्षकों और विद्यार्थियों के अनुपात के साथ स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता से जुड़ी परिस्थितियों का हवाला दिया था।
51:1 पीटीआर का हवाला देकर आवेदन खारिज करने पर सवाल
जिला शिक्षा स्थापना समिति ने पश्चिमी सिंहभूम में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात यानी पीटीआर 51:1 होने का तर्क दिया था। समिति की आशंका थी कि शिक्षकों का दूसरे जिलों में तबादला होने से जिले के 68 स्कूल शिक्षकविहीन हो सकते हैं।
शिक्षकों की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार की 14 मई 2025 की स्थानांतरण नीति में असाध्य रोग और दिव्यांगता जैसी विशेष परिस्थितियों के लिए प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे मामलों में केवल पीटीआर को आधार बनाकर सभी आवेदनों को एक साथ खारिज करना नीति के अनुरूप नहीं है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि स्थानांतरण सेवा का हिस्सा है और किसी कर्मचारी को अपनी पसंद के स्थान पर पदस्थ रहने का स्वतः अधिकार नहीं है। सरकार ने अपने पक्ष में पूर्व के एक न्यायिक आदेश का भी हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने कहा- राज्य की स्थानांतरण नीति के अनुरूप होना चाहिए फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षकों के दावों को मुख्य रूप से 51:1 के पीटीआर के आधार पर खारिज किया गया था, जबकि राज्य सरकार की अधिसूचना में असाध्य रोग और दिव्यांगता जैसी विशेष परिस्थितियों के लिए अपवाद का प्रावधान है।
अदालत के अनुसार, स्थानांतरण नीति पूरे झारखंड के लिए निर्धारित है। ऐसे में केवल इस आशंका के आधार पर आवेदनों को खारिज करना उचित नहीं कि तबादले के कारण पश्चिमी सिंहभूम के कुछ स्कूलों में शिक्षक कम हो सकते हैं। दूसरे जिलों से शिक्षकों के आने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने माना कि जिला स्तर पर सभी दावों को एक साथ खारिज करने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड सक्षम प्राधिकारी के पास भेजे जाने चाहिए थे, ताकि प्रत्येक मामले पर लागू नीति के अनुसार विचार किया जा सके।
मैट्रिक के खराब परिणाम के लिए प्राथमिक शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराने पर भी टिप्पणी
जिला शिक्षा स्थापना समिति ने पश्चिमी सिंहभूम में मैट्रिक परीक्षा के खराब परिणाम और जिले की रैंकिंग का भी उल्लेख किया था।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। इसलिए उन्हें मैट्रिक परीक्षा के खराब परिणाम के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब शिक्षकों के मामलों की जांच की जा चुकी थी और उनके दावे स्थानांतरण नीति के दायरे में पाए गए थे, तब आवेदनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाना चाहिए था।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक को 10 सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को दोनों याचिकाओं में शामिल शिक्षकों के आवेदन तथा संबंधित रिकॉर्ड प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पास भेजने का निर्देश दिया है।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक को दस्तावेजों की जांच कर लागू स्थानांतरण नीति के अनुरूप निर्णय लेने, आवश्यक स्वीकृति देने और तबादला आदेश जारी करने को कहा गया है।
अदालत ने पूरी प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के 10 सप्ताह के भीतर पूरी करने की समयसीमा तय की है।
झारखंड हाईकोर्ट के इस फैसले से असाध्य रोग और अन्य विशेष परिस्थितियों के आधार पर अंतरजिला तबादले की मांग कर रहे 90 शिक्षकों को राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति के प्रावधानों पर विचार करना जरूरी है और केवल शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात के आधार पर सभी दावों को खारिज नहीं किया जा सकता।
अब संबंधित शिक्षकों के आवेदन प्राथमिक शिक्षा निदेशक के स्तर पर जांचे जाएंगे। अंतिम तबादला आदेश लागू नीति और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के अनुसार जारी किए जाएंगे।
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