वॉशिंगटन, 14 अगस्त 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने आयातित ड्रोन और उनसे जुड़े कुछ पुर्जों पर नए शुल्क लगाने का फैसला किया है। अमेरिकी सरकार ने इस कदम के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू ड्रोन निर्माण क्षमता को मजबूत करने की जरूरत बताई है। (Law Street)
संवेदनशील ड्रोनों पर सबसे ज्यादा शुल्क
नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले कुछ ड्रोन और उनके प्रमुख घटकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इसमें 25 किलोग्राम से अधिक वजन वाले ड्रोन तथा थर्मल इमेजिंग जैसी क्षमताओं वाले कुछ मॉडल शामिल हैं। छोटे और कम संवेदनशील ड्रोन पर 25 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। (The Verge)
नए शुल्कों का बड़ा हिस्सा राष्ट्रपति की घोषणा के करीब तीन सप्ताह बाद प्रभावी होगा, जबकि कुछ कम संवेदनशील घटकों के लिए अलग समयसीमा रखी गई है। (Reuters)
चीन पर ज्यादा असर की संभावना
अमेरिकी नीति का एक प्रमुख उद्देश्य ड्रोन और उनके पुर्जों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करना है। चीन लंबे समय से वैश्विक वाणिज्यिक ड्रोन बाजार में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है, इसलिए नई नीति का असर चीनी निर्माताओं पर विशेष रूप से पड़ने की संभावना है।
अमेरिकी अधिकारियों ने पहले भी विदेशी निर्मित ड्रोन से जुड़े डेटा सुरक्षा और आपूर्ति-श्रृंखला जोखिमों को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी सरकार ने पिछले वर्षों में घरेलू ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने और महत्वपूर्ण तकनीक के लिए सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया है। (The White House)
सहयोगी देशों के लिए अलग दरें
नई व्यवस्था में कुछ अमेरिकी सहयोगी देशों के लिए अपेक्षाकृत कम शुल्क रखा गया है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, ताइवान और कुछ अन्य क्षेत्रों से आने वाले पात्र उत्पादों पर करीब 15 प्रतिशत, जबकि ब्रिटेन से आने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। (Reuters)
घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर
टैरिफ के साथ अमेरिकी प्रशासन ने देश में ड्रोन और उनके घटकों के निर्माण को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। इसका मकसद विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटाने के साथ अमेरिकी कंपनियों के लिए घरेलू उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहित करना है। (The Verge)
यह फैसला अमेरिका-चीन के बीच तकनीक और व्यापार से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच आया है। नई नीति से अमेरिकी ड्रोन बाजार में लागत और आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जबकि घरेलू निर्माताओं को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
