पटना: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि सरकार अक्टूबर तक शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर प्राथमिकता से काम करेगी। इसके बाद नवंबर से शिक्षा विभाग का मुख्य फोकस सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने पर होगा। मंत्री ने साफ किया कि पढ़ाई में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के प्रति इसके बाद किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
मंत्री पटना कॉलेजिएट स्कूल के 191वें स्थापना दिवस और पूर्ववर्ती छात्र पारिवारिक मिलन समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों की सुविधाओं, स्थानांतरण नीति, सरकारी स्कूलों की स्थिति और विद्यार्थियों की पढ़ाई को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी।
आपात स्थिति में 48 घंटे में छुट्टी देने की तैयारी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों को अपनी छुट्टी से जुड़ी समस्याओं के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आपातकालीन परिस्थितियों में शिक्षकों को 48 घंटे के भीतर छुट्टी उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई।
उन्होंने कहा कि यदि तय समय में आपातकालीन अवकाश की अनुमति नहीं मिलती है तो संबंधित शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था को 31 अक्टूबर तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
11 राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर तैयार हुई ट्रांसफर पॉलिसी
मिथिलेश तिवारी ने बताया कि बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए तैयार की गई नीति को अंतिम रूप देने से पहले दूसरे राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया। इसके लिए देश के 11 राज्यों की ट्रांसफर पॉलिसी का अध्ययन कराया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं और उनके हितों को लेकर गंभीर है। अक्टूबर तक संबंधित मुद्दों पर काम पूरा करने के बाद विभाग का ध्यान विद्यार्थियों की पढ़ाई, शिक्षण व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता पर केंद्रित रहेगा।
97 हजार स्कूलों में करीब दो करोड़ विद्यार्थी पंजीकृत
शिक्षा मंत्री ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक ई-शिक्षा पोर्टल पर करीब 97 हजार सरकारी स्कूल पंजीकृत हैं और इन विद्यालयों में लगभग दो करोड़ बच्चों का नामांकन दर्ज है।
उन्होंने बताया कि करीब 20 हजार स्कूल निर्धारित 21 मानकों पर खरे उतर रहे हैं। वहीं लगभग 77 हजार विद्यालयों में कुछ न कुछ कमियां अभी मौजूद हैं। सरकार इन कमियों को दूर करने के लिए काम कर रही है।
सरकारी स्कूलों को लेकर सोच बदलने की जरूरत
शिक्षा मंत्री ने सरकारी विद्यालयों को लेकर समाज में बनी नकारात्मक धारणा बदलने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में प्रतिभा की कमी होने की धारणा सही नहीं है और इसे बदलने की जरूरत है।
उन्होंने पूर्ववर्ती छात्रों से अपने पुराने विद्यालयों के विकास में योगदान देने की अपील की। मंत्री के अनुसार, स्कूलों की सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण में सुधार के लिए समाज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
हर सरकारी स्कूल में बनेगा एलुमनाई एसोसिएशन
मंत्री ने राज्य के सभी स्कूलों में पूर्ववर्ती छात्रों का संगठन बनाने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने पटना कॉलेजिएट स्कूल एलुमनाई एसोसिएशन के काम की सराहना करते हुए कहा कि इसी तरह की व्यवस्था दूसरे विद्यालयों में भी विकसित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 15 अगस्त के बाद पटना कॉलेजिएट स्कूल के एलुमनाई एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर इस दिशा में आगे की रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य पूर्व छात्रों के अनुभव और सहयोग को स्कूलों के विकास से जोड़ना है।
पटना कॉलेजिएट को हेरिटेज स्कूल बनाने की मांग
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की प्राचार्य सरिता शर्मा ने पटना कॉलेजिएट स्कूल को हेरिटेज स्कूल के तौर पर विशेष पहचान देने की मांग शिक्षा मंत्री के सामने रखी। उन्होंने स्कूल की आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का भी आग्रह किया।
प्राचार्य ने पूर्ववर्ती छात्रों से भी विद्यालय के साथ लगातार जुड़े रहने और इसके विकास में सहयोग करने की अपील की।
एलुमनाई एसोसिएशन को मिलेगा कार्यालय
प्राचार्य ने बताया कि स्कूल परिसर में पूर्ववर्ती छात्र एसोसिएशन के लिए कार्यालय की व्यवस्था की जाएगी। इससे संगठन को विद्यालय की गतिविधियों और विकास कार्यों से बेहतर तरीके से जुड़ने में मदद मिलेगी।
समारोह में कुम्हरार विधायक संजय गुप्ता, फुलवारी विधायक श्याम रजक, पूर्व विधायक अरुण कुमार सिन्हा, समाजसेवी कमल नोपानी और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय प्रिय समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अंजलि श्रीवास्तव ने किया।
