हरिनारायण सिंह ने बिहार की राजनीति में 10वीं बार विधायक बनकर इतिहास रचा है। यह उपलब्धि उन्हें राज्य के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक बनाती है। उनका यह रिकॉर्ड उनकी राजनीतिक कुशलता और जनता के अटूट समर्थन को दर्शाता है।
पटना। 18वीं बिहार विधानसभा में सबसे अधिक बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड जदयू के हरिनारायण सिंह के नाम दर्ज हो गया है। उन्होंने दो विधानसभा क्षेत्रों में कुल 10 बार जीत दर्ज की है। उनकी उम्र 78 साल है। उनसे साल भर बड़े जदयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव का भी रिकॉर्ड है।
ये नौ बार से लगातार विधायक हैं। इनका विधानसभा क्षेत्र सुपौल है। ऐसा ही रिकॉर्ड विधानसभा अध्यक्ष बनने जा रहे प्रेम कुमार का भी है। ये लगातार गया शहर से विधायक बन रहे हैं। 2025 में उन्होंने नौंवी जीत दर्ज की है।
हरिनारायण सिंह नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा से जीत कर रिकॉर्ड बना चुके हैं, वह दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीट रही है। नीतीश पहली बार 1985 में यहीं से विधायक बने थे।
दूसरी बार उन्होंने 1995 में जीत दर्ज की थी, लेकिन जीत के तुरंत बाद त्याग पत्र दे दिया था। हरिनारायण सिंह नीतीश मंत्रिमंडल में मंत्री भी रहे हैं। वे दोनों विधानसक्षा क्षेत्रों से पांच-पांच बार विधायक बने।
हिंदी में 215 व 21 विधायकों में अन्य चार भाषा में ली शपथ
उल्लेखनीय है कि 18वीं विधानसभा में पहले दिन शपथ लेने वाले कुल 236 विधायकों में राष्ट्रभाषा हिंदी में 215, जबकि 21 विधायकों ने मैथिली, उर्दू, संस्कृत एवं अंग्रेजी भाषा को चुना। अंग्रेजी में शपथ लेने वाले विधायकों में लोजपा (रामविलास) के विधायक विष्णुदेव पासवान, भाजपा के सिद्धार्थ सौरभ एवं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के चेतन आनंद एवं राहुल सिंह का नाम सम्मिलित हैं।
वहीं, संस्कृत में शपथ लेने वालों में कटिहार के भाजपा विधायक तारकिशोर प्रसाद, सोनबरसा से जदयू विधायक रत्नेश सदा और जदयू के मुकेश कुमार रहे।
मिथिलांचल क्षेत्र से आने वाले विधायकों ने अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ ली। इनमें मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, झंझारपुर के विधायक नीतीश मिश्रा, अलीनगर से निर्वाचित सबसे कम उम्र की विधायक एवं लोकगायिका मैथिली ठाकुर, सुधांशु शेखर, विनोद नारायण झा, मीना कामत, माधव आनंद, सुजीत कुमार, विनय चौधरी, राजेश कुमार मंडल, संजय सरावगी, रामचंद्र प्रसाद, मुरारी मोहन झा एवं आसिफ अहमद के नाम सम्मिलित हैं।


