असंगठित क्षेत्र के कामगारों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. आधिकारिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त मंत्रालय ‘अटल पेंशन योजना’ (APY) के तहत मिलने वाली मासिक पेंशन की अधिकतम सीमा को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है. पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने इस संबंध में सरकार को पहले ही अपनी सिफारिशें भेज दी हैं.
महंगाई और सामाजिक सुरक्षा का संतुलन
अटल पेंशन योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों, खेतिहर मजदूरों और छोटे व्यापारियों को उनके रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित आय सुनिश्चित करना था. वर्तमान में इस योजना के तहत ग्राहकों को ₹1,000 से लेकर ₹5,000 प्रति माह तक की पेंशन दी जाती है. हालांकि, पिछले एक दशक में बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत में हुई वृद्धि को देखते हुए, ₹5,000 की राशि को अपर्याप्त माना जा रहा है. पेंशन राशि में प्रस्तावित बढ़ोतरी का उद्देश्य ग्राहकों को एक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है.
योजना का विस्तार और सरकार का दृष्टिकोण
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है, जो इस योजना के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है. PFRDA के आंकड़ों के अनुसार, योजना से अब तक 9 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़ चुके हैं. यदि पेंशन की सीमा को ₹10,000 किया जाता है, तो यह योजना उन मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए भी आकर्षक बन जाएगी जो अब तक सीमित रिटर्न के कारण इससे दूरी बनाए हुए थे.
नियम और शर्तों में बदलाव की संभावना
पेंशन राशि बढ़ने के साथ ही योजना की संरचना में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी अपेक्षित हैं.
- अंशदान: ₹10,000 की पेंशन प्राप्त करने के लिए मासिक प्रीमियम की राशि वर्तमान दर से अधिक होगी. यह राशि सदस्य की उम्र के आधार पर तय की जाएगी.
- नामांकन अवधि: वर्तमान में इस योजना में शामिल होने की अधिकतम आयु 40 वर्ष है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि अधिक पेंशन स्लैब के लिए आयु सीमा में भी कुछ राहत दी जा सकती है.
- सरकारी गारंटी: यह एक संप्रभु गारंटी वाली योजना है, जो इसे अन्य निजी निवेशों की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाती है.
यद्यपि इस प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय की अंतिम मुहर लगनी बाकी है, लेकिन सरकार का यह रुख स्पष्ट करता है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है.


