वैश्विक स्तर पर जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई है. सुबह के सत्र में घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए. बीएसई (BSE) सेंसेक्स करीब 250 अंक या 0.32 प्रतिशत की उछाल के साथ 76,752 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया, जबकि एनएसई (NSE) निफ्टी 46.90 अंक या 0.20 प्रतिशत की बढ़त लेकर 23,928.95 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया.
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल: कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे आगे
बाजार में सेक्टोरल मोर्चे पर मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है. आज के कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी ‘निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स’ में दर्ज की गई, जो करीब 1.39 प्रतिशत ऊपर चढ़कर कारोबार कर रहा था. इसके बाद ‘निफ्टी मिड-स्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज’ में 0.95 प्रतिशत, ‘निफ्टी सीमेंट’ में 0.69 प्रतिशत और ‘निफ्टी प्राइवेट बैंक’ में 0.66 प्रतिशत की बढ़त देखी गई. इसके अलावा सरकारी बैंक और ऑटो सेक्टर भी क्रमश: 0.64 प्रतिशत और 0.62 प्रतिशत की मजबूती के साथ बाजार को सहारा दे रहे हैं.
आईटी सेक्टर पर भारी दबाव, ये शेयर्स गिरे
दूसरी ओर, आईटी कंपनियों के शेयरों में आज भारी बिकवाली देखी जा रही है. ‘निफ्टी आईटी’ इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ सबसे बड़ा घाटे में रहने वाला सेक्टर बनकर उभरा है. निफ्टी के प्रमुख शेयरों की बात करें तो इंफोसिस (Infosys), एचसीएल टेक (HCLTech), टेक महिंद्रा (Tech Mahindra), टीसीएस (TCS), डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और हिंडालको इंडस्ट्रीज के शेयरों में 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है.
ट्रंप के बयान और कच्चे तेल में उछाल का असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और ईरान पर किए गए नए हवाई हमलों के कारण निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा है. ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका ने रातभर में ईरान पर नए हमले किए हैं. ट्रंप ने साफ किया कि उनके लिए अब ईरान के साथ कोई भी बातचीत समय की बर्बादी है.
इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 1.49 प्रतिशत बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है. वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल पर है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि 80 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भारत के लिए फिलहाल बड़ी चिंता नहीं है. लगातार जारी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी और स्थिर तेल कीमतें लार्ज-कैप शेयरों, विशेष रूप से बैंकिंग और ऑटोमोबाइल्स को मजबूती प्रदान कर सकती हैं. एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 2 प्रतिशत चढ़ा है, जबकि हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 1 प्रतिशत टूट गया है.


