Thursday, April 30, 2026

राज्य के सरकारी विद्यालयों के अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षकों के योगदान की तिथि सात फरवरी तक बढ़ा दी गई है।

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राज्य के अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षकों के योगदान की अंतिम तिथि 7 फरवरी तक बढ़ा दी गई है, जो पहले 21 जनवरी थी। 27,171 में से 21,700 शिक्षक पहले ही योगदान कर चुके हैं। साथ ही, बिहार के 72 हजार प्रारंभिक विद्यालयों में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों के समग्र विकास के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

पटना। राज्य के सरकारी विद्यालयों के अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षकों के योगदान की तिथि सात फरवरी तक बढ़ा दी गई है।

इस संबंध में शनिवार को प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया। इसमें कहा गया कि अंतरजिला स्थानांतरित शिक्षकों का आवंटित विद्यालय में सात फरवरी तक योगदान स्वीकृत किया जाए। पहले यह तिथि 21 जनवरी तक थी। 

अंतरजिला स्थानांतरित 27,171 शिक्षकों में से ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर पांच-पांच प्रखंड का विकल्प उपलब्ध कराने वाले 22,928 शिक्षकों को जिलों द्वारा प्रखंड एवं विद्यालय आवंटित किया गया है।

इनमें से 21,700 शिक्षकों द्वारा 21 जनवरी तक योगदान भी किया जा चुका है। 1,228 शिक्षकों ने अब तक आवंटित विद्यालय में योगदान नहीं किया है।

72 हजार प्रारंभिक विद्यालयों में हुई अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी

राज्य के सभी 72 हजार प्रारंभिक विद्यालयों में शनिवार को अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में अभिभावकों ने शिक्षकों के साथ मिलकर यह संकल्प लिया कि हम और आप मिलकर बच्चों का समग्र विकास करेंगे।

अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई की प्रगति से काफी खुश हुए। इससे पहले विद्यालयों की ओर से अभिभावकों को संगोष्ठी में शामिल होने हेतु आमंत्रण भेजा गया था।

विद्यालयों के दरवाजे पर अभिभावकों की प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों द्वारा आगवानी की गयी। उसके बाद अभिभावक उन वर्ग कक्षों में ले जाए गए, जिनमें उनके बच्चे पढ़ते हैं।

वहीं अभिभावकों के साथ शिक्षकों ने संवाद किया। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुरूप इस बार हर विद्यालय में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी हम और आप मिल कर करेंगे बच्चों का समग्र विकास थीम पर हुई।

अभिभावकों को बताया गया कि बच्चों के विकास की प्रक्रिया में विद्यालय और अभिभावक दोनों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।

शिक्षकों ने अभिभावकों को प्रेरित किया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, ताकि सभी बच्चे आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और समाज के सक्रिय सदस्य बन सकें।

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