Thursday, September 17, 2026

रांची में सितंबर के अंत से शुरू होगा फैटी लीवर मुक्त अभियान, 500 जगहों पर होगी जांच’.

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रांची: फैटी लीवर की बढ़ती समस्या को देखते हुए राजधानी में विशेष स्वास्थ्य अभियान शुरू करने की तैयारी है। ‘फैटी लीवर मुक्त रांची’ नाम से चलने वाले इस अभियान की शुरुआत सितंबर के अंत तक होने की संभावना है। इसके तहत एक साल में करीब 1.20 लाख लोगों की स्क्रीनिंग करने का लक्ष्य रखा गया है।

अभियान के दौरान मोबाइल चिकित्सा वाहनों के जरिए जिले के अलग-अलग हिस्सों में जांच सुविधा पहुंचाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का फोकस बीमारी की शुरुआती पहचान के साथ लोगों को खान-पान और जीवनशैली को लेकर जागरूक करने पर भी रहेगा।

500 चिन्हित स्थानों पर पहुंचेगी मोबाइल टीम

यह पहल रांची सदर अस्पताल और नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज के सहयोग से संचालित होगी। डॉ. एसके सरीन के मार्गदर्शन में आधुनिक जांच उपकरणों से लैस चार मोबाइल मेडिकल वाहन अभियान में लगाए जाएंगे।

इनमें से दो वाहन रांची पहुंच चुके हैं, जबकि दो अन्य वाहनों को जल्द शामिल किया जाना है। ये मोबाइल यूनिट जिले के लगभग 500 चिन्हित स्थानों पर जाकर लोगों की जांच करेंगी।

प्रारंभिक स्तर पर संभावित मरीजों की पहचान आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से की जाएगी। इसके बाद एबीसीडी रिस्क स्कोर की मदद से अधिक जोखिम वाले लोगों को अलग से चिन्हित किया जाएगा।

1000 स्वास्थ्यकर्मियों को मिलेगा प्रशिक्षण

अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए जिले के सभी प्रखंडों और अनुमंडलीय अस्पतालों में करीब 1000 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिन लोगों में बीमारी का जोखिम अधिक पाया जाएगा, उन्हें जरूरत के मुताबिक आगे की जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह के लिए रेफर किया जाएगा।

अभियान में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को भी जोड़ा जाएगा। 100 से अधिक शिक्षण संस्थानों के छात्रों के माध्यम से स्वस्थ खान-पान और बेहतर जीवनशैली का संदेश लोगों तक पहुंचाने की योजना है।

शुरुआती चरण में अक्सर नहीं दिखते लक्षण

फैटी लीवर की स्थिति में लिवर में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मोटापा, मधुमेह, कम शारीरिक गतिविधि और असंतुलित खान-पान शामिल हैं। शराब का सेवन भी फैटी लीवर के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।

शुरुआती दौर में कई लोगों में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। कुछ मामलों में थकान, कमजोरी या पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता जैसी शिकायत हो सकती है। बीमारी बढ़ने पर लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

जीवनशैली में बदलाव पर भी रहेगा जोर

अभियान का उद्देश्य केवल स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहेगा। लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और स्वस्थ वजन बनाए रखने के प्रति जागरूक किया जाएगा। अधिक कैलोरी वाले भोजन और मीठे पेय के सेवन को सीमित करने जैसे उपायों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति में फैटी लीवर की पुष्टि होने पर आगे की जांच और उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। शुरुआती पहचान के बाद जीवनशैली में जरूरी बदलाव बीमारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

जांच के लिए अत्याधुनिक मशीन भी उपलब्ध

अभियान के लिए करीब 1.10 करोड़ रुपये की लागत वाली आधुनिक जांच मशीन उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ करीब 40 हजार रुपये की लागत से एक वाहन भी उपलब्ध कराया गया है।

सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद के अनुसार शुरुआती अवस्था में फैटी लीवर की पहचान होने से समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। अभियान के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक जांच और स्वास्थ्य जागरूकता की सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

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