रांची: झारखंड में रोजगार, शिक्षा और युवाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों और युवाओं का आंदोलन लगातार गति पकड़ रहा है। राजधानी रांची में आयोजित एक प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदर और नागपुरी गीतों के बीच प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकारों की मांग को जोरदार तरीके से उठाया।
प्रदर्शन के दौरान “गांव छोड़ब नहीं, जंगल छोड़ब नहीं, माटी छोड़ब नहीं” जैसे पारंपरिक नारे पूरे इलाके में गूंजते रहे। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह केवल रोजगार का सवाल नहीं, बल्कि झारखंड के युवाओं के भविष्य और अधिकारों की रक्षा का मुद्दा है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, चयन प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताएं और बढ़ती बेरोजगारी के कारण लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि कठिन मेहनत के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों को उचित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिकता बढ़ने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
प्रदर्शन में शामिल अभिभावकों ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार आर्थिक कठिनाइयों के बीच बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है, लेकिन रोजगार के समय उन्हें अपेक्षित अवसर नहीं मिलते। उन्होंने पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के ऐतिहासिक जननायकों बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू के संघर्षों का उल्लेख करते हुए युवाओं से एकजुट रहने का आह्वान किया। उनका कहना था कि अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
सांस्कृतिक रंग में आयोजित इस प्रदर्शन में पारंपरिक संगीत, लोकगीत और जनगीतों के माध्यम से भी अपनी मांगों को सामने रखा गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक रोजगार, शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा।
