Saturday, October 31, 2026

रांची एयरपोर्ट पर ILS और PAPI सिस्टम का सफल परीक्षण, कोहरे और कम दृश्यता में लैंडिंग में मिलेगी मदद.

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रांची | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News

झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शनिवार को महत्वपूर्ण तकनीकी जांच की गई। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की फ्लाइट इंस्पेक्शन यूनिट (FIU) ने एयरपोर्ट के इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और प्रिसिजन अप्रोच पाथ इंडिकेटर (PAPI) का फ्लाइट कैलिब्रेशन किया।

इस प्रक्रिया के दौरान एक विशेष विमान की मदद से लैंडिंग प्रणालियों के संकेतों और उनकी कार्यक्षमता की जांच की गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि रनवे के आसपास स्थापित उपकरण पायलटों को सही और सटीक जानकारी दे रहे हैं।

कोहरे और कम दृश्यता में लैंडिंग में मिलेगी सहायता

सर्दियों के मौसम में कोहरा और खराब दृश्यता विमान परिचालन के लिए चुनौती बन सकते हैं। ऐसे समय में ILS और PAPI जैसी तकनीकें पायलटों को लैंडिंग के दौरान जरूरी संकेत उपलब्ध कराती हैं।

इन प्रणालियों की नियमित जांच से उनकी सटीकता और कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर पायलटों को भरोसेमंद तकनीकी सहायता मिल सके।

ILS सिस्टम कैसे करता है काम?

इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) विमान को रनवे की सही दिशा में लाने और निर्धारित कोण से नीचे उतारने में पायलट की मदद करता है। इसके दो प्रमुख हिस्से होते हैं—

  • लोकलाइजर: विमान को रनवे की सीध में बनाए रखने के लिए दिशा संबंधी संकेत देता है।
  • ग्लाइड पाथ: विमान को उचित ऊंचाई और कोण के साथ रनवे की ओर नीचे उतरने में सहायता करता है।

इन संकेतों के आधार पर पायलट लैंडिंग के दौरान विमान की दिशा और ऊंचाई को नियंत्रित कर सकते हैं।

PAPI लाइटें बताती हैं विमान की सही ऊंचाई

रनवे के किनारे लगी PAPI लाइटें पायलट को यह समझने में मदद करती हैं कि लैंडिंग के समय विमान सही ऊंचाई पर है या नहीं। इन लाइटों से मिलने वाले संकेतों के आधार पर पायलट अपने अप्रोच को आवश्यकतानुसार समायोजित कर सकते हैं।

कम दृश्यता की स्थिति में भी ये संकेत लैंडिंग प्रक्रिया में सहायक होते हैं।

सुरक्षित हवाई परिचालन में CNS विभाग की अहम भूमिका

एयरपोर्ट का कम्युनिकेशन, नेविगेशन एंड सर्विलांस (CNS) विभाग हवाई परिचालन की तकनीकी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह विभाग पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच संचार व्यवस्था बनाए रखने के साथ नेविगेशन और विमानों की निगरानी से जुड़ी प्रणालियों के संचालन में भूमिका निभाता है।

फ्लाइट कैलिब्रेशन अभियान में रांची एयरपोर्ट के CNS प्रभारी अविनाश सोरेंग के नेतृत्व में टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।

नियमित जांच से तकनीकी विश्वसनीयता का आकलन

ILS और PAPI सिस्टम का फ्लाइट कैलिब्रेशन यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है कि जमीन पर स्थापित उपकरणों से मिलने वाले संकेत निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं। रांची एयरपोर्ट पर हुई इस जांच से इन प्रणालियों की कार्यक्षमता का आकलन किया गया है।

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