रांची : दूसरे राज्यों से सटे झारखंड के सीमावर्ती जिले में SIR कराना चुनाव आयोग के लिए चुनौती जैसा है. जिसे ध्यान में रखते हुए आयोग ने खास तैयारी की है जिससे कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर ना हो. इन सबके बीच मैपिंग के दौरान फर्जी डॉक्यूमेंट के इस्तेमाल की भी शिकायत चुनाव आयोग तक पहुंचने लगी है. संथाल में इस तरह की शिकायत मिलने के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार को दो दिवसीय दौरा करना पड़ा है. इस दौरान पाकुड़ में एक व्यक्ति फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर एसआईआर में इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया है.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि इस मामले में उस व्यक्ति की गिरफ्तारी हो गई है और कांड दर्ज कर लिया गया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर मैपिंग नहीं हो सकती है. यदि इस तरह की कोशिश की गई तो संबंधित व्यक्ति, अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा और उन्हें जेल जाना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि जो भी डाक्यूमेंट्स जमा होंगे, उसका एईआरओ लेवल पर जांच के बाद उपायुक्त स्तर पर क्रॉस जांच होगी. ऐसे में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है. गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर महीने में भी साहिबगंज और लोहरदगा जिलों में फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने की शिकायत प्राप्त हुई थी और कार्रवाई की गयी थी.
SIR के दौरान फर्जी डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल पड़ सकता है महंगा
SIR के दौरान फर्जी डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल महंगा पड़ सकता है. अगर कोई व्यक्ति SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने या अपडेट करने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र या जाली दस्तावेज जमा करता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है. इसके अलावे यदि कोई नागरिक एसआईआर फॉर्म भरते समय जानबूझकर गलत जानकारी देता है, या एक साथ दो अलग-अलग जगहों की वोटर लिस्ट में नाम रखने की कोशिश करता है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत 1 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है. ऐसे में आयोग का मानना है कि मल्टी लेयर चेकिंग में हरेक वोटर की पात्रता की जांच होगी, जिसमें अवैध रूप से नाम वोटर लिस्ट में जुड़ना मुश्किल है.
जिला उपायुक्तों को फर्जी दस्तावेज को लेकर दिए गए निर्देश
फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए एसआईआर में भागीदारी निभाने की मिली जानकारी के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को सचेत करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं. जारी पत्र के अनुसार, गढ़वा सहित अन्य जिलों में पूर्व में भी फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने की सूचना को ध्यान में देते हुए सभी उपायुक्तों को ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कानून की संगत धाराओं के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार के द्वारा पत्र लिखकर यह भी निर्देशित किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के दौरान जितने भी दस्तावेज जमा किए जाएंगे, उनके सत्यापन का दायित्व जिला निर्वाचन पदाधिकारी का है. ऐसे में एसआईआर के निमित्त कोई भी नागरिक फर्जी या अनाधिकृत दस्तावेज ना बनवाए और ना ही ऐसा प्रयास किसी के द्वारा किया जाए, इसे लेकर सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त को व्यापक प्रचार प्रसार करने को कहा गया है.


