पटना, 26 अक्टूबर 2026। बिहार की अदालतों में लंबित मामलों की सुनवाई में देरी रोकने के लिए राज्य सरकार ने सरकारी गवाहों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया है।
सरकार के इस निर्देश के दायरे में पुलिस अधिकारी, डॉक्टर, प्रशासनिक पदाधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न मामलों में गवाही देने के लिए अदालत में उपस्थित होना होता है। उद्देश्य यह है कि सरकारी गवाहों की गैरमौजूदगी के कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया पत्र
इस संबंध में बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया है। यह पत्र विभाग के सचिव रजनीश कुमार की ओर से भेजा गया है।
पत्र सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों और सचिवों के साथ पुलिस महानिदेशक को भेजा गया है। इसके अलावा प्रमंडलीय आयुक्तों, क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों एवं उपमहानिरीक्षकों, जिलाधिकारियों और वरीय पुलिस अधीक्षकों तथा पुलिस अधीक्षकों को भी निर्देश की जानकारी दी गई है।
सरकारी गवाहों की गैरमौजूदगी से प्रभावित होती है सुनवाई
सरकार के पत्र में अदालतों में चल रहे मामलों की सुनवाई के दौरान सरकारी गवाहों की उपस्थिति को महत्वपूर्ण बताया गया है। संबंधित अधिकारी या कर्मचारी समय पर अदालत नहीं पहुंचते हैं, तो सुनवाई टल सकती है और मामले के निपटारे में देरी हो सकती है।
निर्देश में यह भी रेखांकित किया गया है कि कई बार विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण सरकारी गवाह समय पर उपस्थित नहीं हो पाते। इनमें पुलिसकर्मी, डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी और दूसरे सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
आरोपितों को मिल सकता है प्रक्रियागत देरी का लाभ
सरकार ने अपने पत्र में सरकारी गवाहों की अनुपस्थिति से होने वाली देरी पर चिंता जताई है। ऐसी स्थिति में मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है और आरोपितों को प्रक्रियागत देरी का लाभ मिलने की आशंका रहती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों को गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने को कहा गया है। हालांकि, किसी मामले में आरोपित का दोष या निर्दोष होना न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होता है।
DM और SP को करनी होगी समुचित व्यवस्था
राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने कार्यालयों में ऐसी व्यवस्था करने का निर्देश दिया है, जिससे अदालत में गवाही के लिए बुलाए गए सरकारी अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय पर उपस्थित हो सकें।
इसमें संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, गवाही की तारीखों की जानकारी और समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाना शामिल है।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य अदालतों में सरकारी गवाहों की गैरमौजूदगी से होने वाली अनावश्यक देरी को कम करना और मामलों की सुनवाई को सुचारु बनाने में सहयोग करना है।
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