Monday, August 17, 2026

बिहार में आयुष्मान योजना का बढ़ा दायरा, 4.12 करोड़ कार्ड जारी; 31 लाख से ज्यादा मरीजों को मिला कैशलेस इलाज.

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पटना: बिहार में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) का विस्तार लगातार हो रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 तक राज्य में 4.12 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके थे। योजना के तहत 1.32 करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाया गया है।

इसी अवधि तक योजना के तहत 31.33 लाख से ज्यादा अस्पताल में भर्ती मामलों को मंजूरी दी गई, जबकि इलाज के लिए 4,645.57 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अधिकृत हुई।

1.32 करोड़ परिवारों तक पहुंचा कवरेज

बिहार में शुरुआती तौर पर करीब 1.21 करोड़ परिवार आयुष्मान भारत योजना के लिए पात्र थे। अप्रैल 2024 से आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं से जुड़े 3.12 लाख परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया।

इसके बाद अक्टूबर 2024 में 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को योजना के दायरे में लाया गया। इसके चलते राज्य में कवरेज का दायरा बढ़कर करीब 1.32 करोड़ परिवारों तक पहुंच गया।

1,188 अस्पताल योजना से जुड़े

फरवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 1,188 अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध थे। इनमें 433 सरकारी और 755 निजी अस्पताल शामिल थे।

पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 305 निजी अस्पतालों को योजना के नेटवर्क में जोड़ा गया। इससे पात्र मरीजों को सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज का विकल्प मिला।

31.33 लाख से ज्यादा इलाज को मंजूरी

28 फरवरी 2026 तक राज्य में आयुष्मान योजना के तहत 31.33 लाख अस्पताल दाखिलों को अधिकृत किया गया था। इनके लिए 4,645.57 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर हुई।

इनमें पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 15.09 लाख अस्पताल दाखिले और 2,026.32 करोड़ रुपये से अधिक की अधिकृत राशि शामिल थी।

बुजुर्गों के लिए भी विशेष कवरेज

आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य कवरेज दिया गया है। फरवरी 2026 तक बिहार में करीब 3.96 लाख आयुष्मान वय वंदना कार्ड जारी किए जा चुके थे।

यह सुविधा वरिष्ठ नागरिकों को गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़े खर्च में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

इलाज के खर्च में बड़ी बचत का दावा

केंद्र सरकार ने जून 2025 में बताया था कि बिहार में आयुष्मान भारत योजना के कारण लाभार्थियों के इलाज पर होने वाले जेब से खर्च में एक साल के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई। राज्य में मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को भी आयुष्मान भारत के साथ जोड़ा गया है।

अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर जोर

बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठकों में आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज करने और योजना से जुड़े अस्पतालों का नेटवर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों के निरीक्षण, क्लेम प्रोसेसिंग और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति की भी समीक्षा की जा रही है।

मार्च 2026 में आयोजित ‘आयुष्मान मंथन’ कार्यक्रम में अस्पतालों की भागीदारी, उपचार की गुणवत्ता और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर चर्चा हुई। आयोजकों के अनुसार, योजना से जुड़े 92 फीसदी निजी अस्पतालों के प्रशिक्षण का काम पूरा हो चुका था।

डिजिटल निगरानी और शिकायत निवारण पर फोकस

योजना के संचालन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग, नियमित ऑडिट और शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अस्पतालों की सूचीबद्धता से संबंधित समस्याओं के लिए 14413 हेल्पलाइन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

क्लेम निपटारे के लिए सामान्य व्यवस्था के तहत राज्य के अस्पतालों के दावों को 15 दिनों और दूसरे राज्यों में पोर्टेबिलिटी से जुड़े मामलों को 30 दिनों में निपटाने का प्रावधान है।

ग्रामीण इलाकों तक पहुंच अब भी चुनौती

आयुष्मान योजना का विस्तार होने के बावजूद बिहार के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। मार्च 2026 में सामने आए CAG ऑडिट में लाभार्थी सत्यापन, अस्पतालों की सूचीबद्धता, क्लेम निपटारे और निगरानी से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया गया था।

ऑडिट के अनुसार मार्च 2024 तक संशोधित 6.18 करोड़ लाभार्थी लक्ष्य में से 2.56 करोड़, यानी करीब 41 फीसदी का सत्यापन हुआ था। हालांकि इसके बाद कार्ड निर्माण और योजना के कवरेज में तेजी देखने को मिली।

अस्पतालों के भुगतान में देरी का मुद्दा

मई 2026 में कुछ सूचीबद्ध अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत क्लेम भुगतान में देरी की शिकायत की थी। अस्पतालों का कहना था कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण उनके संचालन, दवाओं की खरीद और कर्मचारियों के भुगतान पर असर पड़ रहा है। विभाग की ओर से प्रक्रिया को सामान्य करने के प्रयास की बात कही गई थी।

उस समय राज्य में योजना के तहत 1,298 अस्पताल सूचीबद्ध होने की जानकारी सामने आई थी, जिनमें 434 सरकारी और 864 निजी अस्पताल शामिल थे।

आगे किन क्षेत्रों पर रहेगा जोर?

आयुष्मान योजना को और प्रभावी बनाने के लिए बिहार में ग्रामीण स्तर पर अस्पतालों की उपलब्धता बढ़ाना, जिला स्तर पर विशेषज्ञ उपचार की सुविधा मजबूत करना, पात्र लेकिन बिना कार्ड वाले लोगों को योजना से जोड़ना और अस्पतालों के क्लेम का समय पर भुगतान महत्वपूर्ण होगा।

इसके साथ ही डिजिटल निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए फर्जी दावों पर रोक लगाने की कोशिश भी जरूरी होगी। डिजिटल हेल्थ सिस्टम के विस्तार से मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से जोड़ने और इलाज की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

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