Bihar Health News | 3 नवंबर 2026: बिहार में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी पहल की है। राज्य के 312 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर (OT) और प्रसव कक्ष यानी लेबर रूम को अपग्रेड किया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और प्रसव संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
312 CHC में सुविधाओं का होगा आकलन
राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी जिलों के सिविल सर्जन और संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को जरूरी तैयारियां शुरू करने का निर्देश दिया है।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने इस संबंध में अधिकारियों को पत्र जारी किया है। निर्देश के मुताबिक, प्रत्येक चयनित CHC में ऑपरेशन थिएटर और प्रसव कक्ष की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
इसके लिए गैप एनालिसिस यानी उपलब्ध सुविधाओं और जरूरी संसाधनों के बीच अंतर का आकलन किया जाएगा।
उपकरणों से लेकर डॉक्टरों तक की होगी समीक्षा
अस्पतालों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- अस्पताल में आने वाले मरीजों की संभावित संख्या।
- ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम में उपलब्ध उपकरण।
- विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता।
- नर्सिंग और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति।
- अतिरिक्त उपकरणों और संसाधनों की जरूरत।
इस आकलन के आधार पर प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र के लिए आवश्यक सुविधाओं और उपकरणों की सूची तैयार की जाएगी।
केंद्र की योजना के तहत बजट का प्रावधान
इन 312 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को FRU के रूप में विकसित करने और मौजूदा ऑपरेशन थिएटर को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार की ‘फाइनेंशियल असिस्टेंस फॉर पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूशंस’ (FAPHI) योजना के तहत बजट आवंटित किया गया है।
उपकरणों की जरूरत के अनुसार मांग बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) के EMMS पोर्टल पर ऑनलाइन भेजी जाएगी।
राज्य स्वास्थ्य समिति ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तैयार की गई रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर उसे ई-मेल के माध्यम से भेजें। इसका उद्देश्य निर्धारित बजट का समय पर और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
ग्रामीण मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत
यदि योजना के तहत जरूरी उपकरण, विशेषज्ञ डॉक्टर और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराए जाते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज की सुविधाओं में सुधार हो सकता है।
FRU के रूप में विकसित होने वाले केंद्रों में ऑपरेशन और प्रसव संबंधी सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। इससे मरीजों को गंभीर परिस्थितियों में बेहतर रेफरल और उपचार सुविधा मिल सकेगी।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने संसाधनों का आकलन और उपकरणों की जरूरत तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। वास्तविक सुविधाएं उपलब्ध होने का लाभ योजना के क्रियान्वयन और अस्पतालों में जरूरी मानव संसाधन की तैनाती पर निर्भर करेगा।
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