Saturday, May 2, 2026

बिहार के कैमूर जिले के सारादोग गांव में 51 कमजोर जनजातीय परिवारों को सोलर बिजली मिलेगी।

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बिहार के कैमूर जिले के सारादोग गांव में 51 कमजोर जनजातीय परिवारों को सोलर बिजली मिलेगी। भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड (बीआरबीसीएल) और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) के बीच सीएसआर के तहत समझौता हुआ है। बीआरबीसीएल पूरी लागत वहन करेगी। यह पहल जनजातीय क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगी और परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाएगी, जिससे वे ऊर्जा आत्मनिर्भर बनेंगे।

पटना। बिहार के जनजातीय क्षेत्रों में सतत ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कैमूर जिले के सारादोग गांव में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के 51 परिवारों के घरों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इससे गांव के लोगों को स्वच्छ और स्थायी बिजली सुविधा मिल सकेगी।

सीएसआर के तहत हुआ अहम समझौता

इस परियोजना को लेकर भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड (बीआरबीसीएल) और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) के बीच गुरुवार को पटना में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के अंतर्गत किया गया है।

समझौता कार्यक्रम में कई अधिकारी रहे मौजूद

एमओयू हस्ताक्षर के दौरान डी.के. सिंह, निदेशक (परियोजना), डी.आर. देहुरी, सीईओ, बीआरबीसीएल और जय शंकर सहनी, मुख्य अभियंता (परियोजना-1, ग्रामीण), एसबीपीडीसीएल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इस परियोजना को जनजातीय विकास के लिए अहम बताया।

बीआरबीसीएल वहन करेगी पूरी परियोजना लागत

इस सोलर विद्युतीकरण परियोजना की पूरी लागत भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड द्वारा अपने सीएसआर कोष से वहन की जाएगी। इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और जरूरतमंद परिवारों तक सीधे लाभ पहुंचेगा।

पीवीटीजी परिवारों के जीवन में आएगा बदलाव

सारादोग गांव के जिन 51 पीवीटीजी परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा, उनके जीवन स्तर में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। बिजली की उपलब्धता से बच्चों की पढ़ाई, घरेलू कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी।

ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। सोलर पैनल से न केवल बिजली की समस्या दूर होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।

सरकार और कंपनियों की संयुक्त पहल

यह परियोजना सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण है। बीआरबीसीएल और एसबीपीडीसीएल की यह साझेदारी दर्शाती है कि सीएसआर के माध्यम से सामाजिक बदलाव संभव है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदम

सोलर पैनल लगने के बाद गांव के परिवार ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्हें पारंपरिक बिजली आपूर्ति पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे भविष्य में बिजली कटौती जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी।

अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए बनेगा मॉडल

अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में अन्य जनजातीय और ग्रामीण इलाकों के लिए मॉडल के रूप में काम करेगी। सफल क्रियान्वयन के बाद इस तरह की योजनाओं को राज्य के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।

सतत विकास की दिशा में मजबूत कदम

कुल मिलाकर, सारादोग गांव में 51 परिवारों तक सोलर बिजली पहुंचाने की यह पहल सतत विकास, सामाजिक समावेशन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत और सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

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