Wednesday, July 8, 2026

बाजार में भारी गिरावट सेंसेक्स 1,677 अंक और निफ्टी 516 अंक गिरकर 24,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ.

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 8 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मच गया, क्योंकि दोनों प्रमुख सूचकांकों में 2% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई. आज बीएसई सेंसेक्स 1,677.12 अंक की भारी गिरावट के साथ 76,503.60 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 516.65 अंक टूटकर 23,882.05 के स्तर पर आ गया. इस भीषण बिकवाली के कारण दलाल स्ट्रीट पर एक ही दिन में निवेशकों के लगभग ₹9 लाख करोड़ स्वाहा हो गए. [1, 2]

गिरावट की मुख्य वजह: वैश्विक तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद
बाजार में अचानक आए इस भूचाल का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है. नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक घोषणा की कि ईरान के साथ हुआ अस्थायी युद्धविराम समझौता अब आधिकारिक रूप से “खत्म” हो चुका है. इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की. इस खबर ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में खलबली मचा दी और निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स (शेयरों) को बेचकर सुरक्षित ठिकानों का रुख किया.

कच्चे तेल में उबाल और रुपये की कमजोरी
इस युद्ध जैसी स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें 5% से अधिक उछल गईं. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी और देश में महंगाई का दबाव बढ़ेगा. इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 95.17 के निचले स्तर पर आ गया.

सेक्टर्स का हाल: चारों तरफ लाल निशान
फार्मा जैसे कुछ सुरक्षित क्षेत्रों को छोड़कर आज हर सेक्टर में गिरावट देखी गई:

बैंकिंग सेक्टर: निफ्टी बैंक इंडेक्स में 2.4% से अधिक की गिरावट आई. एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) जैसे बड़े शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा नीचे खींचा.

तेल पर निर्भर कंपनियां: कच्चे तेल के महंगे होने से एशियन पेंट्स और इंडिगो (Aviation) जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई, क्योंकि इनकी लागत बढ़ने का डर है.

बढ़ने वाले शेयर: केवल ओएनजीसी (ONGC) जैसी सरकारी तेल उत्पादक कंपनियां 1% से अधिक की तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुईं, क्योंकि तेल महंगा होने से इन्हें सीधा मुनाफा होता है.

निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे भू-राजनीतिक संकट के समय रिटेल निवेशकों को घबराहट में आकर अपने शेयर नहीं बेचने चाहिए. जो लोग म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, उन्हें अपनी एसआईपी (SIP) जारी रखनी चाहिए ताकि उन्हें निचले स्तर पर ज्यादा यूनिट्स मिल सकें. सीधे शेयरों में निवेश करने वालों को अभी अपनी रणनीति बदलकर फार्मा और एफएमसीजी (FMCG) जैसे सुरक्षित और घरेलू सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

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