हेल्थ डेस्क: चाय या कॉफी पीना कई लोगों की रोजाना की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन अगर आप इन्हें बेहद गर्म तापमान पर पीते हैं, तो यह आदत सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकती है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ी एक बड़ी रिसर्च में बेहद गर्म पेय पदार्थों और एसोफेजियल कैंसर यानी खाने की नली के कैंसर के बीच संबंध पाया गया है।
रिसर्च के अनुसार, बहुत गर्म चाय या कॉफी पीने वाले लोगों में सामान्य या गुनगुने तापमान पर पेय लेने वालों की तुलना में एसोफेजियल कैंसर का जोखिम लगभग तीन गुना तक अधिक पाया गया। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक इस कैंसर का कुल जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है।
65 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर सावधानी
अध्ययन में 65 डिग्री सेल्सियस या इससे ज्यादा तापमान वाले पेय को बहुत गर्म श्रेणी में रखा गया। ऐसे गर्म तरल पदार्थ बार-बार पीने से खाने की नली की अंदरूनी परत पर गर्मी का असर पड़ सकता है।
रिसर्च में करीब 9.77 लाख अधेड़ उम्र के महिला और पुरुषों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि बहुत गर्म पेय लेने वाले प्रतिभागियों में एसोफेजियल कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत कम तापमान वाले पेय लेने वालों से अधिक था।
यह अध्ययन International Journal of Cancer में प्रकाशित हुआ है।
दिन में कई बार गर्म ड्रिंक लेने वालों को भी सावधानी
रिसर्च में यह संकेत भी मिला कि दिन में छह या उससे ज्यादा गर्म पेय लेने की आदत एसोफेजियल कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, केवल पेय की संख्या ही नहीं, बल्कि उसे किस तापमान पर पिया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण माना गया है।
चाय या कॉफी में दूध मिलाने से तापमान कुछ कम हो सकता है, लेकिन अगर पेय इतना गर्म है कि मुंह या जीभ में जलन महसूस हो, तो उसे तुरंत पीने से बचना बेहतर है।
उबलती चाय तुरंत न पिएं
चाय या कॉफी तैयार होने के तुरंत बाद उसका तापमान काफी अधिक हो सकता है। कप में डालने के बाद भी पेय कुछ समय तक बेहद गर्म रह सकता है। इसलिए इसे पीने से पहले कुछ मिनट इंतजार करना एक आसान सावधानी हो सकती है।
कैंसर रिसर्च यूके की सलाह के मुताबिक, गर्म पेय का कोई एक तय “सुरक्षित” तापमान बताना आसान नहीं है। व्यावहारिक तौर पर पेय को तब पीना बेहतर है जब वह आरामदायक तापमान तक ठंडा हो जाए और मुंह या जीभ में गर्मी या जलन महसूस न हो।
कुछ विशेषज्ञ गर्म कॉफी के लिए लगभग 49 से 60 डिग्री सेल्सियस के तापमान को पीने योग्य सीमा के तौर पर बताते हैं, हालांकि इस संबंध में और अध्ययन की जरूरत है।
गर्म पेय के अलावा भी कई जोखिम कारक
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर लोगों में बहुत गर्म पेय पीने की आदत कम हो जाए, तो एसोफेजियल कैंसर के कुछ मामलों को रोका जा सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि गर्म चाय या कॉफी इस कैंसर का एकमात्र कारण है।
एसोफेजियल कैंसर के कई अन्य महत्वपूर्ण जोखिम कारक भी हैं। इनमें धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन प्रमुख माने जाते हैं। इसलिए कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए केवल पेय पदार्थों के तापमान पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
एसोफेजियल कैंसर से जुड़े संभावित लक्षणों में लगातार सीने में जलन, अपच, गले या छाती में दर्द और बिना वजह वजन कम होना शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
अगर ऐसे लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार परेशान करें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। साथ ही, चाय या कॉफी को बहुत गर्म अवस्था में पीने के बजाय थोड़ा ठंडा होने देना रोजमर्रा में अपनाई जा सकने वाली आसान सावधानी है।
