पटना। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से लगातार नमी युक्त हवा के बीच तापमान में उतार-चढ़ाव की स्थिति बने होने के साथ आंधी-पानी का प्रभाव बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार उत्तर पूर्वी बांग्लादेश और इसके आसपास के इलाकों में हवा का चक्रवाती परिसंरचरण( कम दबाव का क्षेत्र) एवं पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वाली हवा जो हिमालय से टकराकर अन्य राज्यों के मौसम में बदलाव लाने वाली (पश्चिमी विक्षोभ) की सक्रियता एक के बाद एक बनने से प्रदेश के मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।
इनके प्रभाव से अगले चार से पांच दिनों के दौरान प्रदेश के अलग-अलग भागों में मेघ गर्जन के साथ आंधी-पानी को लेकर स्थिति बनी रहेगी। अगले 24 घंटों के दौरान दक्षिण बिहार के ज्यादातर जिलों के अधिकतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के आसार है। इसके बाद 24 घंटे के दौरान तापमान में गिरावट की संभावना है।
18 जिलों में मेघ गर्जन के साथ आंधी पानी की चेतावनी
जबकि, उत्तर बिहार के 18 जिलों में मेघ गर्जन, वज्रपात के साथ आंधी-पानी की स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इन भागों में 40-50 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। बीते 24 घंटों के दौरान नालंदा में हवा की गति 48 किमी प्रतिघंटा दर्ज की गई।
उत्तर बिहार के अलग-अलग भागों में वर्षा दर्ज की गई। पूर्णिया के बनमनखी में 12.6 मिमी, पूर्णिया के बांके बाजार में 3.4 मिमी, किशनगंज में 1.0 मिमी, पूर्णिया के बैसा में 0.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। सोमवार को प्रदेश के अलग-अलग भागों के अधिकतम तापमान में वृद्धि दर्ज की गई।
धूप निकलने के साथ तापमान में वृद्धि
पटना के अधिकतम तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ 35.4 डिग्री सेल्सियस एवं 40.0 डिग्री सेल्सियस के साथ कैमूर में सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया। पटना सहित आसपास इलाकों में मौसम साफ रहा और धूप निकलने के साथ तापमान में वृद्धि दर्ज की गई।
फसलों के लिए वर्षा उपयोगी
मौसम विज्ञान केंद्र ने खेती-किसानी को लेकर बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि ऐसे मौसम में आम, लीची एवं मक्का के फसलों की देखभाल जरूरी है। हल्की वर्षा एवं नमी से फलों की वृद्धि एंव गुणवत्ता में लाभ मिलेगा।
हालांकि तेज हवा एवं अधिक वर्षा से फलों को गिरने एवं टूटने के साथ संक्रमण का खतरा बढ़ सकती है। ऐसे में बगीचे में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत है। फलों में दरार से बचाव को लेकर मिट्टी में संतुलित नमी बनाए रखने की आवश्यकता है।
फूफंद जनित रोगों की रोकथाम के लिए दवाओं का छिड़काव जरूरी है। गिरे हुए फलों एवं संक्रमित पत्तियों को बगीचे से हटाकर नष्ट करें ताकि रोगों का प्रसार कम हो। मक्का की खेती के दौरान खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें ताकि पानी जमा न हो।
तेज हवा से मक्का पौधे के गिरने की संभावना रहती है। ऐसे में पौधे के आधार पर मिट्टी चढ़ाएं। कटाई के लिए तैयार भुट्टों को सुरक्षित एवं सूखी जगह पर रखें ताकि नमी बरकरार रहे।
प्रमुख शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
| शहर | अधिकतम (°C) | न्यूनतम (°C) |
|---|---|---|
| पटना | 35.4 | 24.8 |
| गयाजी | 36.0 | 24.0 |
| भागलपुर | 34.1 | 23.7 |
| मुजफ्फरपुर | 33.0 | 24.1 |


