पटना | 29 अक्टूबर 2026 |
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़े फरक्का समझौते की अवधि पूरी होने से पहले बिहार सरकार ने राज्य के हितों को लेकर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में जल संसाधन विभाग की ओर से 30 अक्टूबर को पटना में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश के जल विशेषज्ञ गंगा में गाद जमाव, बाढ़ और जल प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन से पहले गंगा नदी का हवाई सर्वेक्षण भी प्रस्तावित था, लेकिन खराब मौसम के कारण इसमें बाधा आई। मौसम अनुकूल रहने पर 30 अक्टूबर की सुबह सर्वेक्षण किए जाने की संभावना जताई गई है। प्रस्तावित सर्वे में बक्सर से भागलपुर होते हुए फरक्का तक गंगा की धारा, नदी के फैलाव और तलहटी में जमा गाद की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।
12 दिसंबर को समझौते के 30 साल होंगे पूरे
भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को गंगा जल बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था। इसकी 30 वर्ष की अवधि 12 दिसंबर 2026 को पूरी हो रही है। बिहार सरकार का कहना है कि भविष्य में इस समझौते को लेकर होने वाले फैसलों में राज्य के हितों को भी उचित महत्व मिलना चाहिए।
इस मुद्दे पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की ओर से भी अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा गंगा किनारे बसे 12 जिलों में ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रमों के जरिए इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने में जुटे हैं।
बिहार सरकार का जोर है कि गंगा में गाद जमाव और उससे जुड़ी बाढ़ की समस्या का वैज्ञानिक अध्ययन हो तथा केंद्र के सामने राज्य की चिंताओं को तथ्यों के साथ रखा जाए।
30 अक्टूबर को पटना में जुटेंगे जल विशेषज्ञ
पटना के चाणक्य होटल में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गंगा में गाद जमाव, नदी की बदलती धारा और बाढ़ नियंत्रण के संभावित उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की पहल पर आयोजित किया जा रहा है।
विजय कुमार चौधरी के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए गाद और बाढ़ की समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त करना है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र के साथ हुई बैठक में राष्ट्रीय गाद नीति बनाने की मांग उठाई गई है।
सम्मेलन में प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य सरकार आगे की रणनीति तैयार कर सकती है।
खराब मौसम के कारण हवाई सर्वेक्षण प्रभावित
गंगा नदी की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए बक्सर से भागलपुर होते हुए फरक्का तक हवाई सर्वेक्षण प्रस्तावित है। खराब मौसम के चलते 29 अक्टूबर को यह कार्य नहीं हो सका। अब मौसम साफ रहने की स्थिति में अगले दिन सर्वेक्षण किए जाने की संभावना है।
इस दौरान विशेष कैमरों और तकनीकी उपकरणों की मदद से नदी के प्रवाह क्षेत्र, फैलाव, धारा में बदलाव और तलहटी में जमा गाद की तस्वीरें तथा वीडियो जुटाए जाने हैं।
सर्वेक्षण से प्राप्त दृश्य सामग्री को पटना में होने वाले सम्मेलन में विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि नदी की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और संभावित उपायों पर चर्चा करने में मदद मिल सके।
WALMI के विशेषज्ञ भी होंगे शामिल
इस अभियान में पटना स्थित जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (WALMI) के तकनीकी विशेषज्ञों के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है। सर्वेक्षण में गंगा के अलग-अलग हिस्सों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और वीडियो एकत्र किए जाने की योजना है।
जल संसाधन विभाग की जनसंपर्क पदाधिकारी करुणा कृति के मुताबिक, सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य गंगा के प्रवाह क्षेत्र, नदी के फैलाव और तलहटी में जमा गाद की वर्तमान स्थिति का आकलन करना है।
एकत्र किए गए आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर नदी की गहराई, तलछट के जमाव और जल प्रवाह में हुए बदलावों को समझने का प्रयास होगा। भविष्य में गाद निकालने, तटबंधों को मजबूत करने और अन्य तकनीकी उपायों पर विचार के लिए यह अध्ययन उपयोगी हो सकता है।
संजय झा चला रहे हैं ‘नीतीश संवाद’ अभियान
फरक्का जल समझौते को लेकर जदयू लगातार जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा गंगा किनारे बसे 12 जिलों में ‘नीतीश संवाद’ के माध्यम से इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
संजय झा इस विषय को राज्यसभा में भी उठा चुके हैं। खबर के मुताबिक, इस मुद्दे पर विदेश मंत्री की ओर से बिहार के हितों को ध्यान में रखने का आश्वासन दिया गया है।
बिहार सरकार और जदयू की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य आगामी समझौते से जुड़ी चर्चा में राज्य की जरूरतों, जल उपलब्धता और बाढ़ की समस्या को प्रमुखता से सामने रखना है।
31 अक्टूबर को जागरूकता दौड़ का आयोजन
फरक्का जल समझौते के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए जदयू की ओर से 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर दौड़ आयोजित करने की योजना है।
आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 11,000 रुपये, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 7,500 रुपये और तीसरे स्थान पर रहने वाले को 5,000 रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
पार्टी इस आयोजन के जरिए गंगा जल बंटवारे और बिहार के हितों से जुड़े मुद्दे को जनस्तर पर उठाना चाहती है।
गंगा जल के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत पर जोर
गंगा नदी बिहार के 12 जिलों—बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, खगड़िया और कटिहार—से होकर लगभग 445 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
इस मुद्दे पर चिंता जताने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा के पानी का बेहतर उपयोग पेयजल और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकता है। जल विशेषज्ञ डॉ. आरके सिन्हा ने भी नदी के पानी का अधिक प्रभावी उपयोग करने की जरूरत पर जोर दिया है।
उनके अनुसार, गंगा के पानी को लिफ्ट कर नहरों के माध्यम से सिंचाई में इस्तेमाल करने और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने जैसे विकल्पों पर अध्ययन किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गाद की समस्या पर बिहार सरकार की पहल से इसके समाधान को लेकर चर्चा आगे बढ़ेगी।
समझौते में बिहार के हितों को शामिल करने की मांग
बिहार सरकार की प्रमुख चिंता यह है कि गंगा जल बंटवारे से जुड़े फैसलों में राज्य की पेयजल, सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं को पर्याप्त महत्व मिले। राज्य में गंगा के प्रवाह, गाद जमाव और बाढ़ की समस्या को लेकर वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने की पहल इसी दिशा में देखी जा रही है।
सरकार के सामने अब हवाई सर्वेक्षण पूरा कराने, विशेषज्ञों के सुझाव संकलित करने और उन्हें केंद्र सरकार के समक्ष रखने की चुनौती है। 30 अक्टूबर का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा।
फरक्का जल समझौते की अवधि पूरी होने से पहले होने वाली चर्चाओं में बिहार की मांगों और विशेषज्ञों के सुझावों को कितनी जगह मिलती है, इस पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
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