प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार को पिछले दशक में केंद्र से 9.23 लाख करोड़ रुपये की सहायता मिली, जो यूपीए काल के 2.8 लाख करोड़ रुपये से तीन गुना अधिक है। भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार के अनुसार, नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद यह वृद्धि हुई। विशेष पैकेज, पीएम-किसान, उज्ज्वला जैसी योजनाओं से राज्य में सड़क, बिजली, कृषि और महिला सशक्तिकरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति मिली है।
पटना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बिहार ने पिछले एक दशक में विकास की वह गति पकड़ी है, जो कांग्रेस-नीत यूपीए सरकारों के दौर में कभी नहीं दिखी। 2004 से 2014 तक यूपीए काल में बिहार को केंद्र से कुल लगभग 2.8 लाख करोड़ रुपये की सहायता मिली थी।
वहीं, 2014 से 2024 के बीच यह राशि बढ़कर 9.23 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह तीन गुना से अधिक वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार ने बिहार को प्राथमिकता दी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार का दावा है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे सुधारों के बावजूद 2025-26 में बिहार को केंद्रीय करों से 1.43 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष से 14 हजार करोड़ रुपये अधिक है।
केंद्र की एनडीए ने विशेष राज्य के दर्जे की बजाय ठोस परियोजनाओं, विशेष पैकेज और प्रत्यक्ष निवेश पर जोर दिया। 2024-25 के बजट में बिहार के लिए 59 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित किया गया, जिसमें सड़क, बिजली और बाढ़ प्रबंधन जैसी योजनाएं सम्मिलित हैं। इसके साथ ही ‘पूर्वोदय योजना’ के तहत पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार के समग्र विकास को गति दी गई।
नई नीतियों का सीधा लाभ किसानों, महिलाओं, व्यापारियों और मजदूरों को मिला है। पीएम-किसान योजना से किसानों को प्रत्यक्ष सहायता मिली, मखाना बोर्ड और सिंचाई परियोजनाओं से खेती मजबूत हुई। उज्ज्वला, मुद्रा और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण मिला। बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी से व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़े।


