पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के कोड़ाडीह मैदान में रविवार को कुड़मी समाज का बड़ा सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन हुआ। ‘करम परबतिया महाजड़ुआहि’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड और ओडिशा समेत विभिन्न क्षेत्रों से समाज के लोग पहुंचे। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने समाज की एकजुटता, शिक्षा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक भागीदारी को लेकर अपनी बात रखी। आयोजन की तैयारियों को लेकर इससे पहले भी झारखंड के विभिन्न इलाकों में समाज की बैठकें हुई थीं।
शिक्षा और आर्थिक विकास पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुदेश महतो ने कहा कि किसी समाज की ताकत केवल उसकी संख्या से तय नहीं होती। शिक्षा, संगठन, सामाजिक जागरूकता और सामूहिक सोच भी समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने युवाओं को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भागीदारी की जरूरत बताई। आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी समाज के विकास की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने पर जोर दिया।
भाषा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा
सुदेश महतो ने कुड़मी समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा और आर्थिक प्रगति के साथ सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित रखना जरूरी है।
उन्होंने करम पर्व को प्रकृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता से जुड़ा अवसर बताया। उनके अनुसार ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भूमिका निभाते हैं।
कुड़मी समाज की पहचान, भाषा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी उन्होंने अपने संबोधन में उठाया। साथ ही शिक्षा, रोजगार और आर्थिक मजबूती को लेकर सामूहिक प्रयास की आवश्यकता बताई।
सभी समुदायों के साथ सहयोग की बात
सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए महतो ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए अलग-अलग समुदायों के बीच सम्मान, सहयोग और संवाद की भावना मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने एसटी, एससी, ओबीसी समेत विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कही।
तीन राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख
सुदेश महतो ने मानभूम और जंगलमहल क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है। ऐसे आयोजनों के जरिए इन संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हुए। इससे पहले आयोजन की तैयारियों से जुड़ी रिपोर्टों में भी उनके मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने की जानकारी सामने आई थी।
कार्यक्रम के दौरान कुड़मी समाज की सांस्कृतिक परंपराओं और करम पर्व से जुड़ी गतिविधियां भी देखने को मिलीं। आयोजन में बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि, महिलाएं, युवा और अन्य लोग मौजूद रहे।
कुड़मी समाज के इस महाजुटान में सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता, शिक्षा और विकास से जुड़े विषय प्रमुखता से सामने आए। आयोजन को लेकर झारखंड और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पुरुलिया पहुंचने की खबरें पहले सामने आई थीं।
