Friday, October 30, 2026

पुग्गू में 5 करोड़ रुपये से बनेगा धूमकुड़िया भवन, मंत्री चमरा लिंडा ने किया शिलान्यास

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गुमला | 29 अक्टूबर 2026 | BharatSuperFastNews

झारखंड के गुमला जिले में आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और युवाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। गुमला प्रखंड के पुग्गू गांव में गुरुवार को बाबा कार्तिक उरांव की जयंती के अवसर पर वृहद धूमकुड़िया भवन का शिलान्यास किया गया। झारखंड के मंत्री चमरा लिंडा ने शिलापट्ट का अनावरण कर भवन निर्माण कार्य की आधारशिला रखी।

राज्य संपोषित योजना के तहत बनने वाले इस भवन पर 4 करोड़ 99 लाख 72 हजार 500 रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रस्तावित भवन को आदिवासी परंपराओं को सहेजने, युवाओं को पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण देने और विद्यार्थियों को पढ़ाई में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बहुउद्देशीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

धूमकुड़िया भवन में मिलेंगी ये सुविधाएं

पुग्गू में बनने वाले धूमकुड़िया भवन में सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ शिक्षा और सामाजिक आयोजनों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

भूतल पर पारंपरिक कला और संगीत का प्रशिक्षण

भवन के भूतल पर प्रशिक्षण हॉल बनाया जाएगा। यहां मांदर, ढोल, नगाड़ा, झांझ और घंट जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र उपलब्ध कराने की योजना है। इनके माध्यम से नई पीढ़ी को आदिवासी लोकसंगीत और पारंपरिक नृत्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और पारंपरिक कलाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

ऊपरी मंजिल पर लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर

भवन के ऊपरी तल पर विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सकेगा।

इस केंद्र के जरिए युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में सहायता देने की योजना है।

सामाजिक कार्यक्रमों और विवाह समारोहों के लिए हॉल

धूमकुड़िया भवन में एक विशाल विवाह हॉल भी बनाया जाएगा। इसका उपयोग विवाह समारोहों के साथ-साथ सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए किया जा सकेगा।

इस तरह भवन को सांस्कृतिक गतिविधियों, शिक्षा और सामुदायिक आयोजनों के साझा केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

संस्कृति और परंपराओं को सहेजना सबकी जिम्मेदारी: चमरा लिंडा

शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि अपनी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को समझने से ही उनके वास्तविक महत्व का एहसास होता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की विरासत के कई महत्वपूर्ण हिस्से पीछे छूट गए हैं। उन्हें फिर से जीवंत करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना जरूरी है।

मंत्री ने भाषा, रीति-रिवाज, पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों को आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान बताते हुए इनके संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक धूमकुड़िया व्यवस्था केवल एक भवन या स्थान तक सीमित नहीं थी। यह युवाओं को सामाजिक व्यवहार, सामुदायिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों की शिक्षा देने का माध्यम भी थी।

संस्कृति के साथ शिक्षा को भी मिलेगा बढ़ावा

मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि धूमकुड़िया भवन के माध्यम से संस्कृति संरक्षण और शिक्षा को एक साथ बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोककलाओं को सीखने के साथ-साथ पढ़ाई पर भी ध्यान देने की अपील की।

उन्होंने युवाओं को डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज तथा क्षेत्र का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

समारोह में जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

शिलान्यास कार्यक्रम से पहले अतिथियों ने बाबा कार्तिक उरांव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, परियोजना निदेशक आईटीडीए, जिला कल्याण पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

गुमला के पुग्गू गांव में प्रस्तावित धूमकुड़िया भवन को आदिवासी संस्कृति और युवाओं की शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस भवन में पारंपरिक कला प्रशिक्षण, लाइब्रेरी, कोचिंग सेंटर और सामाजिक आयोजनों के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।

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