मुंबई: भारतीय शेयर बाजारों के लिए यह सप्ताह “ब्लैक वीक” साबित हुआ. पश्चिम एशिया (West Asia) में युद्ध के गहराते बादलों, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और आईटी सेक्टर में आई जबरदस्त बिकवाली ने घरेलू शेयर बाजार की कमर तोड़ दी. साप्ताहिक आधार पर बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगी है.
बाजार का साप्ताहिक लेखा-जोखा
शुक्रवार को कारोबारी सत्र के अंत में, 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,000 अंक (1.28%) गिरकर 76,664 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 275 अंक (1.14%) की गिरावट के साथ 23,897 पर आ गया. पूरे सप्ताह की बात करें तो सेंसेक्स में 2.3% और निफ्टी में 1.9% की बड़ी गिरावट देखी गई. शुक्रवार को अकेले एक सत्र में निवेशकों के करीब ₹5 लाख करोड़ स्वाहा हो गए.
आईटी सेक्टर में मची हाहाकार
इस सप्ताह बाजार की गिरावट का सबसे मुख्य विलेन ‘आईटी पैक’ (IT Pack) रहा. बीएसई आईटी इंडेक्स सप्ताह भर में लगभग 10% तक टूट गया. दिग्गज कंपनी इंफोसिस और टीसीएस के तिमाही नतीजे तो उम्मीद के मुताबिक रहे, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मैनेजमेंट द्वारा दिए गए “कमजोर गाइडेंस” ने बाजार का मूड खराब कर दिया. निवेशकों को डर है कि वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण आने वाले साल में आईटी कंपनियों की कमाई और ग्रोथ में भारी कमी आ सकती है.
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का असर
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर पैदा कर दिया है. ईरान द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध लगाने की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं. एक सप्ताह में क्रूड ऑयल में 15% का उछाल भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा है.
संस्थागत निवेशकों की चाल
बाजार में तरलता के मोर्चे पर मिश्रित रुझान रहा. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बिकवाली जारी रखी और सप्ताह के दौरान ₹1,369 करोड़ के शेयर बेचे. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹9,782 करोड़ की बड़ी खरीदारी करके बाजार को पूरी तरह धराशायी होने से बचाने की कोशिश की. विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय बाजार अब घरेलू निवेशकों के भरोसे टिका हुआ है.
आगे की राह और विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाला हफ्ता भी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है. निवेशकों की नजर अब भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) आंकड़ों और अमेरिका के मुद्रास्फीति (PCE Inflation) डेटा पर रहेगी. साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत फैसले भी बाजार की अगली दिशा तय करेंगे. फिलहाल, सलाहकारों ने निवेशकों को ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही निवेश करने की सलाह दी है.


