Sunday, September 13, 2026

परिसीमन को लेकर झारखंड में बढ़ी सियासी हलचल, आदिवासी-एससी सीटों पर कांग्रेस ने जताई चिंता; 30 अगस्त को रांची में महाजुटान.

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Gumla/Chainpur: संसद के मानसून सत्र के दौरान परिसीमन से जुड़ा विधेयक आने की संभावनाओं के बीच झारखंड में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। इसी क्रम में झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने चैनपुर में प्रेस वार्ता कर आदिवासी और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों के भविष्य को लेकर चिंता जताई।

2011 की जनगणना को आधार बनाने पर जताई आशंका

बंधु तिर्की ने कहा कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया में 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाता है, तो झारखंड में आदिवासी और एससी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर डाल सकती है।

उन्होंने पूर्व में परिसीमन से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय विभिन्न दलों के नेताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, विरोध के बाद उस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया था।

आरक्षित सीटों में कमी का विरोध

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झारखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है। उनका कहना है कि आदिवासी और एससी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने के बजाय उनके अधिकारों और प्रतिनिधित्व को मजबूत किया जाना चाहिए।

बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन के दौरान इन समुदायों के हितों को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है और किसी भी ऐसी व्यवस्था का विरोध किया जाएगा जिससे आरक्षित सीटों की संख्या कम हो।

कानूनी पहल के लिए कमेटी गठित

इस मुद्दे पर कानूनी पहल की तैयारी भी शुरू होने की जानकारी दी गई। बताया गया कि झारखंड हाईकोर्ट के महाधिवक्ता सुभाषिष सोरेन और रामचंद्र उरांव के नेतृत्व में एक लीगल ड्राफ्टिंग कमेटी गठित की गई है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, समिति अगले कुछ दिनों में इस विषय पर कानूनी प्रारूप तैयार करेगी। इसके बाद विपक्ष के प्रमुख नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले की जानकारी देने और आगे की रणनीति पर चर्चा करने की योजना है।

30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में महाजुटान

परिसीमन और आदिवासी-एससी प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान आयोजित करने की घोषणा की गई है।

आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए आदिवासी और पिछड़े समुदायों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा। रैली के माध्यम से सरकार पर भी दबाव बनाने की रणनीति है।

अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील

महाजुटान की मुख्य प्रवक्ता शशि पन्ना सहित अन्य नेताओं ने आदिवासी और एससी समुदाय के लोगों से बड़ी संख्या में रांची पहुंचने की अपील की है।

नेताओं का कहना है कि परिसीमन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल समुदायों के भविष्य से सीधे जुड़ा है। इसलिए इस मुद्दे पर व्यापक जनभागीदारी जरूरी है।

चैनपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, सुशील दीपक मिंज, अल्बर्ट तिग्गा, प्रमोद खलखो सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।

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